Home 2026 मां महागौरी और महाअष्टमी : पौराणिक कथा क्यों पड़ा मां का नाम ‘महागौरी’?

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मां महागौरी और महाअष्टमी : पौराणिक कथा क्यों पड़ा मां का नाम ‘महागौरी’?

​शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व जैसे-जैसे पूर्णाहुति की ओर बढ़ता है, उसकी दिव्यता और भव्यता चरम पर होती है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि (महाअष्टमी) को जगतजननी के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना का विधान है। मां महागौरी को परम शांति, पवित्रता, सौंदर्य और भक्तों के सभी पापों को धोने वाली देवी माना जाता है।

​कौन हैं मां महागौरी? (स्वरूप का वर्णन)

​पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और उज्ज्वल है। इनके दर्शन मात्र से मन को असीम शांति की अनुभूति होती है।

​विग्रह और रूप: मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर (सफेद) है। इनकी तुलना शंख, चंद्रमा और कुंद के सफेद फूल से की जाती है। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत रंग के ही होते हैं, जो इनकी पवित्रता को दर्शाते हैं।

​भुजाएं: मां महागौरी चार भुजाएं वाली हैं। उनके ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल सुशोभित है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएं हाथ में वरमुद्रा है।

​वाहन: माता का वाहन वृषभ (बैल) है, इसीलिए इन्हें ‘वृषारूढ़ा’ भी कहा जाता है।

​पौराणिक कथा: क्यों पड़ा मां का नाम ‘महागौरी’?

​पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, तब वर्षों तक खुले आसमान के नीचे धूप, वर्षा और ठंड सहने के कारण उनका शरीर काला (श्याम वर्ण) पड़ गया था।

​उनकी इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और गंगा जी के पवित्र जल से उनका अभिषेक किया, तब उनका शरीर बिजली की तरह चमक उठा और वह अत्यंत गौर वर्ण की हो गईं। तभी से उनका नाम ‘महागौरी’ पड़ गया।

​महाअष्टमी तिथि पर पूजन का महत्व और साधना

​नवरात्रि की अष्टमी तिथि का सनातन संस्कृति में विशेष स्थान है। इस दिन को ‘महाअष्टमी’ कहा जाता है और कई घरों में इसी दिन व्रत का उद्यापन और कन्या पूजन किया जाता है। मां महागौरी सौम्य चक्र और शरीर के समस्त अंगों को ऊर्जा प्रदान करती हैं।

​1. समस्त पापों का नाश और शुद्धि:
​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से भक्तों के पिछले जन्मों के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता व पवित्रता का संचार होता है।

​2. सुखी दांपत्य जीवन और सौंदर्य:
​यह देवी वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और स्थिरता लाती हैं। इनकी कृपा से साधક को सौंदर्य, यश, आरोग्यता और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

​पूजा की विधि, रंग और भोग

​रंग का महत्व: महाअष्टमी के दिन सफेद (श्वेत) या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना बहुत शुभ माना जाता है। माता को सफेद फूल (विशेषकर मोगरा या चमेली) अत्यंत प्रिय हैं।

​भोग: मां महागौरी को भोग में नारियल या नारियल से बनी मिठाइयां अर्पित करना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद भी विशेष रूप से चढ़ाया जाता है, जिसका उपयोग कन्या पूजन में भी होता है।

​मंत्र: मां की आराधना करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए:​

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा सुचिः।
महागौरी शुभं दद्याद् महादेव प्रमोददा।।

या सरल मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः

​महाअष्टमी का दिन हमें यह सिखाता है कि कठिन तपस्या और संयम के बाद ही परम शांति और उज्ज्वल भविष्य की प्राप्ति होती है।

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Author: Admin Editor MBC

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