मां महागौरी और महाअष्टमी : पौराणिक कथा क्यों पड़ा मां का नाम ‘महागौरी’?
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व जैसे-जैसे पूर्णाहुति की ओर बढ़ता है, उसकी दिव्यता और भव्यता चरम पर होती है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि (महाअष्टमी) को जगतजननी के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना का विधान है। मां महागौरी को परम शांति, पवित्रता, सौंदर्य और भक्तों के सभी पापों को धोने वाली देवी माना जाता है।
कौन हैं मां महागौरी? (स्वरूप का वर्णन)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और उज्ज्वल है। इनके दर्शन मात्र से मन को असीम शांति की अनुभूति होती है।
विग्रह और रूप: मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर (सफेद) है। इनकी तुलना शंख, चंद्रमा और कुंद के सफेद फूल से की जाती है। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत रंग के ही होते हैं, जो इनकी पवित्रता को दर्शाते हैं।
भुजाएं: मां महागौरी चार भुजाएं वाली हैं। उनके ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल सुशोभित है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएं हाथ में वरमुद्रा है।
वाहन: माता का वाहन वृषभ (बैल) है, इसीलिए इन्हें ‘वृषारूढ़ा’ भी कहा जाता है।
पौराणिक कथा: क्यों पड़ा मां का नाम ‘महागौरी’?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, तब वर्षों तक खुले आसमान के नीचे धूप, वर्षा और ठंड सहने के कारण उनका शरीर काला (श्याम वर्ण) पड़ गया था।
उनकी इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और गंगा जी के पवित्र जल से उनका अभिषेक किया, तब उनका शरीर बिजली की तरह चमक उठा और वह अत्यंत गौर वर्ण की हो गईं। तभी से उनका नाम ‘महागौरी’ पड़ गया।
महाअष्टमी तिथि पर पूजन का महत्व और साधना
नवरात्रि की अष्टमी तिथि का सनातन संस्कृति में विशेष स्थान है। इस दिन को ‘महाअष्टमी’ कहा जाता है और कई घरों में इसी दिन व्रत का उद्यापन और कन्या पूजन किया जाता है। मां महागौरी सौम्य चक्र और शरीर के समस्त अंगों को ऊर्जा प्रदान करती हैं।
1. समस्त पापों का नाश और शुद्धि:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से भक्तों के पिछले जन्मों के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता व पवित्रता का संचार होता है।
2. सुखी दांपत्य जीवन और सौंदर्य:
यह देवी वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और स्थिरता लाती हैं। इनकी कृपा से साधક को सौंदर्य, यश, आरोग्यता और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
पूजा की विधि, रंग और भोग
रंग का महत्व: महाअष्टमी के दिन सफेद (श्वेत) या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना बहुत शुभ माना जाता है। माता को सफेद फूल (विशेषकर मोगरा या चमेली) अत्यंत प्रिय हैं।
भोग: मां महागौरी को भोग में नारियल या नारियल से बनी मिठाइयां अर्पित करना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद भी विशेष रूप से चढ़ाया जाता है, जिसका उपयोग कन्या पूजन में भी होता है।
मंत्र: मां की आराधना करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए:
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा सुचिः।
महागौरी शुभं दद्याद् महादेव प्रमोददा।।
या सरल मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः
महाअष्टमी का दिन हमें यह सिखाता है कि कठिन तपस्या और संयम के बाद ही परम शांति और उज्ज्वल भविष्य की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि विशेष में अब तक आपने पढ़ा…
मां कालरात्रि और सप्तमी तिथि का महत्व: अंधकार और भय का नाश करने वाली महाशक्ति
नवरात्रि विशेष : नवरात्रि की पहली देवी शैलपुत्री की कथा
Shardiiya Navratra: जानिये किसने शुरू किया नवरात्रि व्रत, इतिहास, महत्त्व तथा शास्त्र !
लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप्प से जुड़े। साथ ही “मोक्ष भूमि” के वेबसाइट, facebook, YouTube, Instagram सहित अन्य सोशल मीडिया पर …
विशेष आलेख श्रृंखला “पितृपक्ष”
पितृपक्ष विशेष 09: जानिए पितृ ऋण से मुक्ति और आत्मिक शांति के 4 महान तीर्थ
विशेष आलेख श्रृंखला 04 : इन परहेजों और नियमों का पालन करते हुए करना चाहिए श्राद्धकर्म ?
विशेष में पितृपक्ष -2 : जानिए क्या है पितृ दोष ? कारण, लक्षण और मुक्ति के शास्त्रोक्त सिद्ध उपाय
विशेष श्रृंखला : जानिए क्या है नान्दी श्राद्ध और क्यों हैं हर शुभ कार्य से पहले यह अनिवार्य
विशेष श्रृंखला त्रिपिंडी श्राद्ध
त्रिपिंडी श्राद्ध 4 : जानिए क्या है अकाल मृत्यु, इसके बाद किन जगहों पर जाती है आत्मायें
त्रिपिंडी श्राद्ध -5 : अकाल मृत्यु के बाद अतृप्त आत्माओं को परम शांति और मोक्ष कैसे…
त्रिपिंडी श्राद्ध : जानिए..गरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मृत्यु के बाद आत्मा का सफर
इन अनुष्ठान से जुड़ी कोई जानकारी या शंका समाधान के लिए “मोक्ष भूमि” के 9889940000 व्हाट्सएप नंबर से निशुल्क या अपने कर्मकांडी ब्राम्हण/विद्वान् से सलाह लेना चाहिए।
आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि अलग अलग भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की धार्मिक जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।

“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला
भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..
फाइव लेटेस्ट पोस्ट
श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम
डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।
<img class=”alignnone size-large wp-image-10274″ src=”https://www.mokshbhumi.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG_20250405_090833-1024×642.webp” alt=”” width=”960″ height=”602″ /
विशिष्ट जानकारियां
Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र
Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता
Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध
हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना
Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?
Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?
Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ
यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..
आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह
Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?
आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र
जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?
Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा
शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन
जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व
Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?
जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?
भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में
Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..
वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें
Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता
चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.






Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.