त्रिपिंडी श्राद्ध 6 : पुरखो के लिए क्या कहता हैं स्वप्न विज्ञान, गरुड़ पुराण के संकेत साथ ही जानिए शांति हेतू सरल घरेलू उपाय
“मोक्ष भूमि काशी” के विशेष श्रृंखला “त्रिपिंडी श्राद्ध” के 9 अंक के इस श्रृंखला का 6 वें अंक में जानिए पिछले भागों में हमने अकाल मृत्यु के बाद आत्माओं की श्रेणियों और उनके मुख्य अनुष्ठानों (नारायण बलि व त्रिपिंडी) को समझा। इस विशेष भाग में हम जानेंगे कि यदि कोई जीवात्मा अतृप्त है, तो वह परिवार को क्या संकेत देती है। गरुड़ पुराण और स्वप्न विज्ञान (Oneiromancy) के अनुसार, पितरों की अतृप्ति के संकेत हमारे सपनों और दैनिक जीवन की घटनाओं में छिपे होते हैं।/strong>
1. स्वप्न विज्ञान: सपने में पितरों का आना क्या दर्शाता है?
स्वप्न शास्त्र और गरुड़ पुराण के अनुसार, अतृप्त आत्माएं सीधे संवाद नहीं कर सकतीं, इसलिए वे हमारे अवचेतन मन यानी सपनों के माध्यम से अपनी स्थिति प्रकट करती हैं:
रोते हुए या दुखी देखना: यदि कोई मृत परिजन सपने में बार-बार रोता हुआ, बीमार या कष्ट में दिखाई दे, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनकी आत्मा अभी भी अतृप्त है और वे आपसे सहायता (श्राद्ध/तर्पण) की अपेक्षा कर रहे हैं।
भोजन या पानी मांगना: सपने में यदि कोई पूर्वज भूखा या प्यासा दिखाई दे, अथवा आपसे कुछ मांगता हुआ दिखे, तो यह दर्शाता है कि अकाल मृत्यु के कारण उनका सूक्ष्म शरीर वासना और भूख-प्यास के चक्र से मुक्त नहीं हो पाया है।
मौन खड़े रहना या दूर चले जाना: यदि सपने में वे आपसे कुछ बोलते नहीं, बस चुपचाप आकर खड़े हो जाते हैं, तो यह सचेत करने का संकेत है कि परिवार पर कोई संकट आने वाला है या आप अपने कुल की परंपराएं भूल रहे हैं।
स्वस्थ और मुस्कुराते हुए देखना (सकारात्मक संकेत): यदि वे सपने में प्रसन्न और आशीर्वाद देते हुए दिखें, तो इसका अर्थ है कि आपके द्वारा किए गए उपायों से उन्हें मुक्ति मिल चुकी है और वे अब ‘पितृ लोक’ प्रस्थान कर चुके हैं।
वंश वृद्धि
योग्य होने के बाद भी विवाह न होना या संतान प्राप्ति में लगातार बाधा आना।
अतृप्त आत्माएं कुल वृद्धि को रोक देती हैं।
घर का वातावरण
बिना किसी ठोस कारण के अचानक रोज शाम को घर में कलह या भारीपन महसूस होना।
अतृप्त ऊर्जाओं की उपस्थिति से मानसिक तनाव बढ़ता है।
आर्थिक स्थिति
कमाते हुए भी धन का न बचना, अचानक बड़ा नुकसान होना या व्यापार ठप हो जाना।
इसे शास्त्रों में ‘पितृ शाप’ या पितृ दोष जनित दरिद्रता कहा गया है।
अकारण भय
घर के किसी विशेष कोने में अंधेरा या अजीब सा डर महसूस होना, पालतू पशुओं (कुत्ते/बिल्ली) का अजीब व्यवहार।
जानवर नकारात्मक या अतृप्त सूक्ष्म ऊर्जाओं को जल्दी भांप लेते हैं।
3. शास्त्रों के अनुसार सरल और अचूक घरेलू उपाय
यदि किसी कारणवश परिजन काशी, गया या त्र्यंबकेश्वर जाकर बड़ा अनुष्ठान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर ही नियमित रूप से इन सरल उपायों को करके अतृप्त आत्माओं को शांत किया जा सकता है:
क. दक्षिण दिशा का दीपक (नित्य उपाय)
विधि: रोज शाम के समय घर की दक्षिण दिशा (जो पितरों की दिशा मानी जाती है) में सरसों के तेल या तिल के तेल का एक दीपक जलाएं।
लाभ: यह दीपक भटकी हुई आत्माओं को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग दिखाता है और घर की नकारात्मकता को सोख लेता है।
ख. गीता के सातवें अध्याय का पाठ
महत्व: भगवद्गीता का 7वां अध्याय (ज्ञानविज्ञान योग) जीवात्मा को मोह और भ्रम के बंधनों से मुक्त करता है।
विधि: प्रतिदिन या प्रत्येक अमावस्या को इस अध्याय का पाठ करें और मन में संकल्प लें कि “इस पाठ का पूरा पुण्य मेरे कुल की उस अतृप्त आत्मा को प्राप्त हो।”
ग. अमावस्या का ‘कौआ, कुत्ता और गाय’ ग्रास
विधि: हर महीने आने वाली अमावस्या के दिन घर में बने भोजन का पहला हिस्सा निकालकर कौए, काले कुत्ते और गाय को खिलाएं।
विज्ञान: शास्त्रों में कौए को यम का दूत और कुत्ते को भैरव का वाहन माना गया है। इनके माध्यम से अन्न सीधे सूक्ष्म लोक में अटकी आत्माओं तक ऊर्जा रूप में पहुंचता है।
घ. पीपल वृक्ष पर जल अर्पण
विधि: प्रत्येक शनिवार या अमावस्या को पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध, जल, काले तिल और चीनी मिलाकर अर्पित करें। पीपल में भगवान विष्णु और पितरों का वास माना गया है।
हिंदू सनातन परंपरा बेहद दयालु है। यह मानती है कि मृत्यु के बाद भी परिजनों का कर्तव्य समाप्त नहीं होता। यदि हमारे किसी प्रियजन की मृत्यु असमय (अकाल) हुई है, तो हमारे द्वारा श्रद्धापूर्वक किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी उनकी आत्मा को प्रेत योनि के कष्टों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर कर सकते हैं।
जारी है…अगला 7वा अंक
अब तक आपने पढ़ा
त्रिपिंडी श्राद्ध 4 : जानिए क्या है अकाल मृत्यु, इसके बाद किन जगहों पर जाती है आत्मायें
त्रिपिंडी श्राद्ध -5 : अकाल मृत्यु के बाद अतृप्त आत्माओं को परम शांति और मोक्ष कैसे…
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