त्रिपिंडी श्राद्ध 3 : जानिए “त्रिपिंडी श्राद्ध” के नियम, क्या करें और क्या न करें…से जुड़ी समस्त जानकारी
“मोक्ष भूमि काशी” के विशेष श्रृंखला “त्रिपिंडी श्राद्ध” के 9 अंक के इस श्रृंखला का तीसरी अंक में जानिए त्रिपिंडी श्राद्ध के नियम, क्या करें और क्या न करें…से जुड़ी समस्त जानकारी
त्रिपिंडी श्राद्ध हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष पूजन माना जाता है। यह मुख्य रूप से उन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो, या जिनकी वार्षिक श्राद्ध क्रियाएं किसी कारणवश छूट गई हों, जिसके कारण परिवार को ‘पितृदोष’ का सामना करना पड़ रहा हो।
यह केवल एक सामान्य पूजा नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक शुद्धि की प्रक्रिया है। इसलिए, त्रिपिंडी श्राद्ध करने से पूर्व और दौरान कई कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके।
नीचे इसके नियम, क्या करें और क्या न करें, इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है:
1. त्रिपिंडी श्राद्ध से पूर्व (पहले) ध्यान रखने योग्य बातें
पूजा शुरू होने से कुछ दिन पहले से ही शारीरिक और मानसिक पवित्रता की तैयारी शुरू हो जाती है।
क्या करना चाहिए?
सही स्थान, तिथि और समय का चयन: त्रिपिंडी श्राद्ध मुख्य रूप से पवित्र तीर्थस्थलों पिचासमोचन (काशी ), त्र्यंबकेश्वर (नासिक) और गया जी में ही कराना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके लिए किसी योग्य और विद्वान ब्राह्मण से शुभ मुहूर्त अवश्य निकलवाएं।
ब्रह्मचर्य का पालन: पूजा के कम से कम 3 दिन पूर्व से ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना अनिवार्य है।
सात्विक भोजन: अनुष्ठान से 2-3 दिन पहले से ही घर में पूरी तरह सात्विक भोजन बनना चाहिए। भोजन में लहसुन, प्याज और भारी मसालों का त्याग करें।
क्षमा प्रार्थना: पूजा पर निकलने से पहले अपने घर के मंदिर में पूर्वजों का स्मरण कर उनसे अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें और अनुष्ठान की सफलता की कामना करें।
क्या नहीं करना चाहिए?
व्यसनों से दूरी: पूजा के पूर्व मांस, मदिरा, तंबाकू या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें। ऐसा करने पर पूजा निष्फल हो जाती है।
बाल और नाखून काटना: यदि आप मुख्य कर्ता (पूजा पर बैठने वाले) हैं, तो पूजा से कम से कम 2-3 दिन पहले से बाल, दाढ़ी या नाखून न काटें। यह कार्य पूजा स्थल पर पहुंचकर नियमानुसार ही करें।
स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करिए और स्नान किए हुए बस को वहीं छोड़ दें।
क्रोध और विवाद: मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या घर में कलह न करें। शांत और पवित्र मन से यात्रा की शुरुआत करें।
2. त्रिपिंडी श्राद्ध के दरमियान (पूजा के दौरान) के नियम
जब आप पूजा स्थान पर बैठते हैं, तो उस समय आपकी मानसिक स्थिति और क्रियाएं बेहद मायने रखती हैं।
क्या करना चाहिए?
शास्त्रोक्त विधि का पालन: पूजा में तीन प्रकार के कलश /पिंड (ताम्र, रजत और स्वर्ण या फिर चावल, जौ और काले तिल के आटे से बने पिंड) तीन प्रकार के पितरों (प्रेत, अंतरिक्ष और भूमिगत) के लिए दिए जाते हैं। पंडित जी के हर निर्देश का पूरी श्रद्धा से पालन करें।
वस्त्रों का चयन: पूजा के दौरान पुरुष कर्ता को सफेद धोती और सोला (अंगवस्त्र) धारण करना चाहिए। महिलाएं यदि साथ बैठ रही हैं, तो उन्हें पीले, सफेद या हल्के रंग की सूती साड़ी पहननी चाहिए।
पूर्ण एकाग्रता और मंत्रोच्चार: पूजा के दौरान अपना ध्यान पूरी तरह पितरों की शांति पर केंद्रित रखें। संकल्प के मंत्रों का स्पष्ट उच्चारण ( दोहराये ) करें या अति विकट स्थिति में हो तो पंडित जी द्वारा बोले जा रहे मंत्रों को ध्यान से सुनें।
अनुष्ठान की शुरुआत पूर्व से तथा समाप्ति दक्षिण दिशा से होती है लिहाजा आसन पर बैठने पूर्व अपनी सुविधा का ध्यान रखें।
दान-दक्षिणा और संकल्प: त्रिपिंडी श्राद्ध के अंत में अपनी क्षमता के अनुसार अन्नदान, वस्त्रदान और ब्राह्मणों को दक्षिणा अवश्य दें।
क्या नहीं करना चाहिए?
काले और चमकीले वस्त्रों की मनाही: पूजा के दौरान भूलकर भी काले, नीले या अत्यधिक भड़कीले (चमकीले) रंग के कपड़े न पहनें।
चमड़े की वस्तुओं का निषेध: पूजा पंडाल या वेदी के पास चमड़े की बेल्ट, पर्स या जूते-चप्पल लेकर न जाएं।
लोहे के बर्तनों का उपयोग: श्राद्ध कर्म में लोहे या स्टील के बर्तनों का उपयोग वर्जित माना गया है। पूजा में केवल तांबे, पीतल या चांदी के बर्तनों का ही उपयोग होना चाहिए।
जल्दबाजी या चिड़चिड़ापन: पूजा लंबी चल सकती है ( 3 घंटे), इसलिए धैर्य रखें। किसी भी स्थिति में अपने आसन से बीच में न उठे , फोन चलाना या चिड़चिड़ाना पूरी अनुष्ठान को दूषित कर सकता है।
3. पूजा के तुरंत बाद क्या करें?
पूजा संपन्न होने के बाद वहां गाय, कौए और कुत्ते के लिए भोजन (काकबली) अवश्य निकालें।
अपने पितरों की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें साथ ही उनसे जाने अनजाने में हुए गलतियों के लिए क्षमा याचना भी करें।
घर लौटने पर सीधे मुख्य द्वार से प्रवेश करने से पहले हाथ-पैर धोएं और फिर घर के मंदिर में दीप जलाएं।
“मोक्ष भूमि निवेदन” :
त्रिपिंडी श्राद्ध हमेशा सपरिवार या कम से कम पति-पत्नी को साथ मिलकर करना चाहिए। यदि व्यक्ति अविवाहित है, तो वह अकेले भी इसे कर सकता है। महिलाओं को पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान इस पूजा में बैठने की अनुमति नहीं होती।
इस अनुष्ठान से जुड़ी कोई जानकारी या शंका समाधान के लिए 9889940000 पर व्हाट्सएप कर निशुल्क मदद ली जा सकती है
लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़िए…

इनको भी पढ़िए
स्वप्न शास्त्र : जानिए सपने में सांप देखने के 11 शुभ और 10 अशुभ संकेतों को
स्वप्न शास्त्र : दुर्भाग्य और खतरे का सूचक है सपने में सिंदूर का दिखना, दिख जाए तो ये जरुर करें
क्या आप जानते है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर कहा है, क्या हुआ उस कटे हुए सिर का
घर से दरिद्रता भगाना हो तो रविवार को करें ये उपाय
“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला
भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..
आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि 12 भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की यह जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।

फाइव लेटेस्ट पोस्ट
श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम
डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।

विशिष्ट जानकारियां
Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र
Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता
Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध
हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना
Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?
Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?
Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ
यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..
आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह
Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?
आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र
जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?
Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा
शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन
जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व
Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?
जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?
भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में
Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..
वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें
Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता


चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.



Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.