विशेष आलेख श्रृंखला 04 : इन परहेजों और नियमों का पालन करते हुए करना चाहिए श्राद्धकर्म ?
” मोक्ष भूमि ” के इस विशेष श्रृंखला में पढ़िए..श्राद्ध के दौरान किए जाने वाले परहेजों और नियमो की अत्यंत महत्वपूर्ण व प्रामाणिक जानकारी । सम्पूर्ण जानकारी शास्त्रोक्त परंपरा गरुड़ पुराण व धर्मग्रंथों के सिद्धांतों पर आधारित है। आध्यात्मिक जानकारी के लिए “मोक्षभूमि” सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर है कृपया इनसे जुड़िए
संकलन – डॉ संतोष ओझा | काशी
शास्त्रों के अनुसार तीर्थ स्थल या अपने शहर में पिंड दान और श्राद्ध कर्म करने वाला व्यक्ति (यजमान) केवल एक अनुष्ठानकर्ता नहीं होता, बल्कि वह अपने संपूर्ण वंश और पितरों का प्रतिनिधि होता है। इसलिए, तीर्थ यात्रा की शुरुआत से लेकर श्राद्ध संपन्न होने तक यजमान के लिए कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों और परहेजों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:
1. खान-पान एवं आहार संबंधी नियम (परहेज)
पूर्ण सात्विक आहार: यात्रा शुरू होने से लेकर श्राद्ध पूरा होने तक लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडा और बासी भोजन का पूरी तरह त्याग करें।
तामसिक और वर्जित सब्जियां: मसूर की दाल, चना, उड़द, सरसों का साग, बैंगन, कुम्हड़ा (काली लौकी/पेठा), शलजम, हींग और काला नमक खाने से बचें।
शुद्ध जल व अनाज: भोजन में केवल सादा नमक, सेंधा नमक, गाय का घी, दूध, जौ, चावल, गेहूं और सात्विक फल-सब्जियों का ही प्रयोग करें।
दूसरे का अन्न न ग्रहण करें: श्राद्ध के दिन यजमान को किसी अन्य व्यक्ति के घर या बिना संकल्प वाले स्थान पर भोजन नहीं करना चाहिए।
2. शारीरिक एवं आचरण संबंधी संयम
ब्रह्मचर्य का पालन: तीर्थ यात्रा और पितृ पक्ष के दौरान मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
शरीर की शुद्धि: श्राद्ध के दिन तेल, साबुन, सुगंधित इत्र (सेंट) या उबटन का प्रयोग न करें।
बाल और नाखून काटना वर्जित: तीर्थ स्थल पहुँचने से पहले ही (घर से निकलते समय या निश्चित तिथि से पूर्व) दाढ़ी, बाल और नाखून कटवा लें। श्राद्ध के दिन या यात्रा के बीच में बाल-नाखून काटना पूरी तरह मना है।
चमड़े की वस्तुओं का त्याग: पूजा और तर्पण के समय चमड़े का बेल्ट, जूते, पर्स या घड़ी धारण न करें।
3. मानसिक एवं व्यावहारिक नियम
क्रोध और सत्यवादी आचरण: यात्रा के दौरान किसी पर क्रोध न करें, गाली-गलौज या असत्य न बोलें। वाद-विवाद से पूरी तरह दूर रहें।
अहंकार और दिखावे का त्याग: तीर्थ में दान या पिंडदान करते समय मन में किसी प्रकार का अहंकार न लाएं और न ही अपनी क्षमता का दिखावा करें।
अपरिग्रह (कम से कम सामान): यात्रा के दौरान सादगी बनाए रखें और भूमि पर सोना या साधारण बिस्तर का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है।
4. श्राद्ध के दिन के विशेष नियम
प्रातः स्नान और वस्त्र: प्रातःकाल तीर्थ की पवित्र नदी/सरोवर में स्नान करें और केवल सफेद सूती धोती व कुर्ता/अंगवस्त्र ही धारण करें। काले, नीले या गहरे रंग के वस्त्र पहनकर पितृ कर्म न करें।
धातु का ध्यान: तर्पण और पूजन के समय तांबे, पीतल, चांदी या कांसा के पात्रों का ही प्रयोग करें। लोहे या प्लास्टिक का उपयोग वर्जित है।
निःस्वार्थ भाव से दक्षिणा: श्राद्ध कराने वाले तीर्थ पुरोहित (ब्राह्मण) को आदरपूर्वक दक्षिणा और भोजन दें। उनके साथ दक्षिणा को लेकर मोलभाव या विवाद न करें।
विशेष आलेख श्रृंखला “पितृपक्ष” में अभी तक आपने पढ़ा
विशेष में पितृपक्ष -2 : जानिए क्या है पितृ दोष ? कारण, लक्षण और मुक्ति के शास्त्रोक्त सिद्ध उपाय
विशेष श्रृंखला : जानिए क्या है नान्दी श्राद्ध और क्यों हैं हर शुभ कार्य से पहले यह अनिवार्य
पिछला विशेष श्रृंखला
त्रिपिंडी श्राद्ध 4 : जानिए क्या है अकाल मृत्यु, इसके बाद किन जगहों पर जाती है आत्मायें
त्रिपिंडी श्राद्ध -5 : अकाल मृत्यु के बाद अतृप्त आत्माओं को परम शांति और मोक्ष कैसे…
त्रिपिंडी श्राद्ध : जानिए..गरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मृत्यु के बाद आत्मा का सफर
इन अनुष्ठान से जुड़ी कोई जानकारी या शंका समाधान के लिए “मोक्ष भूमि” के 9889940000 व्हाट्सएप नंबर से निशुल्क या अपने कर्मकांडी ब्राम्हण/विद्वान् से सलाह लेना चाहिए।
लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप्प से जुड़े। साथ ही “मोक्ष भूमि” के वेबसाइट, facebook, YouTube, Instagram सहित अन्य सोशल मीडिया पर …
आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि अलग अलग भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की धार्मिक जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।

“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला
भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..
फाइव लेटेस्ट पोस्ट
श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम
डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।
<img class=”alignnone size-large wp-image-10274″ src=”https://www.mokshbhumi.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG_20250405_090833-1024×642.webp” alt=”” width=”960″ height=”602″ /
विशिष्ट जानकारियां
Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र
Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता
Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध
हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना
Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?
Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?
Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ
यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..
आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह
Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?
आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र
जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?
Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा
शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन
जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व
Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?
जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?
भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में
Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..
वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें
Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता
चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.






Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.