Home 2026 पितृपक्ष विशेष 08 : जन्म या मृत्यु के अशौच में पिंडदान-तर्पण सही या गलत? शास्त्रों के प्रमाण संग सà¤

" मोक्ष भूमि " आपका अभिनंदन करता हैं। धार्मिक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहिये।   निवेदन : " मोक्षभूमि " डेस्क को 9889940000 पर व्हाट्सअप कर निशुल्क ज्योतिष,वास्तु, तीज - त्यौहार और व्रत या अन्य समस्या का समाधान पूछ सकते हैं।

पितृपक्ष विशेष 08 : जन्म या मृत्यु के अशौच में पिंडदान-तर्पण सही या गलत? शास्त्रों के प्रमाण संग समझें पूरा विधान

” मोक्ष भूमि ” के इस विशेष श्रृंखला में पढ़िए..सूतक के दौरान तर्पण पिंडदान और ब्राम्हण भोजन पर धर्म ग्रंथो में नियमो की अत्यंत महत्वपूर्ण व प्रामाणिक जानकारी । सम्पूर्ण जानकारी शास्त्रोक्त परंपरा गरुड़ पुराण व धर्मग्रंथों के सिद्धांतों पर yआधारित है। आध्यात्मिक जानकारी के लिए “मोक्षभूमि” सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर है कृपया इनसे जुड़िए

संकलन – डॉ संतोष ओझा | काशी

– सूतक में श्राद्ध करना पड़ेगा भारी! जानें अशौच समाप्त होने के बाद कैसे करें पितरों को तृप्त

सनातन परंपरा में सूतकम (मरणाशौच) और पातक/जननाशौच (जन्माशौच) के समय व्यक्ति मंत्रोच्चार, पिंडदान, तर्पण और देव/पितृ पूजन के लिए अयोग्य (अशुद्ध) माना जाता है।

अशौच काल में श्राद्ध व तर्पण का निषेध

धर्मशास्त्रीय ग्रंथ ‘धर्मसिंधु’ और ‘निर्णयसिंधु’ में अशौच (सूतक/पातक) के दौरान मंत्रपूर्वक श्राद्ध एवं तर्पण का स्पष्ट निषेध किया गया है:

श्लोक:
अशौचे तु न कर्तव्यं श्राद्धं तर्पणमेव च।
मंत्राणां न जपश्चैव देवतानां च पूजनम्॥
(धर्मसिंधु / निर्णयसिंधु – अशौच निर्णय)

अर्थ: अशौच (सूतक और पातक) की स्थिति में श्राद्ध, जल से तर्पण, वेदमंत्रों का पाठ-जप और देवताओं का पूजन कदापि नहीं करना चाहिए।

सूतक में दान व ब्राह्मण भोजन का निषेध

‘गरुड़ पुराण’ (प्रेतकल्प) में सूतक काल के दौरान पके हुए अन्नदान और ब्राह्मण-भोजन का निषेध करते हुए कहा गया है:

श्लोक:
अशौचे तु यद्दास्यति दानं वा ब्राह्मणाय च।
न च तत्पितृभिः भुक्तं न च देवैः परिगृहीतम्॥
(गरुड़ पुराण, प्रेतकल्प)

अर्थ: अशौच काल में यदि कोई मनुष्य ब्राह्मण को भोजन कराता है या दान देता है, तो उसे न तो देवगण स्वीकार करते हैं और न ही वह पितरों को प्राप्त होता है। वह निष्फल हो जाता है।

अशौच समाप्त होने के बाद का शास्त्रीय विधान

सूतक या पातक समाप्त होने के उपरांत छूटे हुए श्राद्ध-तर्पण को संपन्न करने के लिए शास्त्रों में समय-सारणी निर्धारित है:

यदि अशौच पितृपक्ष के दौरान ही समाप्त हो जाए:
शुद्धि स्नान व क्षौर कर्म (मुंडन आदि) के बाद पितृपक्ष की बची हुई तिथियों में अथवा सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी छूटे हुए पूर्वजों के लिए संकल्प लेकर पिंड-तर्पण संपन्न किया जा सकता है।

यदि अशौच पूरे पितृपक्ष के बाद समाप्त हो:
‘निर्णयसिंधु’ के अनुसार यदि सूतक या पातक पूरे पितृपक्ष में बना रहे और अमावस्या के बाद समाप्त हो, तो आगामी कार्तिक अमावस्या (अथवा आगामी पक्ष की अमावस्या) को वह श्राद्ध-पिंडदान संपन्न कर लेना चाहिए।

अशौच के दौरान केवल मानसिक स्मरण का विधान:

अशौच काल में मंत्रोच्चार, तिल-जल अर्पण और पिंड देना वर्जित है, परंतु चित्त से पूर्वजों का ध्यान किया जा सकता है। उस समय मन ही मन
“ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥”

का मानसिक स्मरण किया जा सकता है।


विशेष आलेख श्रृंखला “पितृपक्ष” में अभी तक आपने पढ़ा..

पितृपक्ष विशेष 07 : सावधान ! पितृपक्ष में भूलकर भी न करें यह गलती, वरना सीधे लगेगा पितृदोष; गरुड़ पुराण में दर्ज है इसका कड़वा सच

पितृ पक्ष 06 : जानिए श्राद्ध / तर्पण में प्रयुक्त होने वाले शब्द के अर्थ, सावधानियाँ संग वर्जित और ग्राह्य खाद्य पदार्थ

पितृ पक्ष विशेष 05 :आचार्य के बिना किसी शुद्ध जल स्थान पर या घर में आप खुद मंत्र उच्चारण कर ऐसे करे तर्पण

विशेष आलेख श्रृंखला 04 : इन परहेजों और नियमों का पालन करते हुए करना चाहिए श्राद्धकर्म ?

विशेष आलेख श्रृंखला 03 : जानिए पितृ पक्ष में पिंड दान और श्राद्ध करने के शुभ समय और तिथियों के क्या है नियम ?

विशेष में पितृपक्ष -2 : जानिए क्या है पितृ दोष ? कारण, लक्षण और मुक्ति के शास्त्रोक्त सिद्ध उपाय

विशेष श्रृंखला : जानिए क्या है नान्दी श्राद्ध और क्यों हैं हर शुभ कार्य से पहले यह अनिवार्य


पिछला विशेष श्रृंखला

विशेष श्रृंखला – पितृ दोष और प्रेत बाधा से मुक्ति का अनुष्ठान : त्रिपिंडी श्राद्ध, जानिए इसे जुड़ी सभी जानकारी संग महामंत्र

त्रिपिंडी श्राद्ध 2 : क्या आपके बनते काम भी बिगड़ रहे हैं? जानें पितृदोष के लक्षण और क्यों ‘त्रिपिंडी श्राद्ध’ है इसका अचूक समाधान

त्रिपिंडी श्राद्ध 3 : जानिए “त्रिपिंडी श्राद्ध” के नियम, क्या करें और क्या न करें…से जुड़ी समस्त जानकारी

त्रिपिंडी श्राद्ध 4 : जानिए क्या है अकाल मृत्यु, इसके बाद किन जगहों पर जाती है आत्मायें

त्रिपिंडी श्राद्ध -5 : अकाल मृत्यु के बाद अतृप्त आत्माओं को परम शांति और मोक्ष कैसे…

त्रिपिंडी श्राद्ध 6 : पुरखो के लिए क्या कहता हैं स्वप्न विज्ञान, गरुड़ पुराण के संकेत साथ ही जानिए शांति हेतू सरल घरेलू उपाय

त्रिपिंडी श्राद्ध : जानिए..गरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मृत्यु के बाद आत्मा का सफर


इन अनुष्ठान से जुड़ी कोई जानकारी या शंका समाधान के लिए “मोक्ष भूमि” के 9889940000 व्हाट्सएप नंबर से निशुल्क या अपने कर्मकांडी ब्राम्हण/विद्वान् से सलाह लेना चाहिए।


लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप्प से जुड़े। साथ ही “मोक्ष भूमि” के वेबसाइट, facebook, YouTube, Instagram सहित अन्य सोशल मीडिया पर …


आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि अलग अलग भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की धार्मिक जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।



“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला

भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..



फाइव लेटेस्ट पोस्ट

Marriage special : सात फेरे या सात जन्मों का रहस्य? जानिए सनातनी विवाह की उन रस्मों का सच, जिनसे आज भी अनजान हैं आप!

अक्षय तृतीया विशेष: क्यों भगवान परशुराम ने किया था अपनी माता का वध? जानें अहंकार और न्याय की यह अद्भुत कथा

अक्षय तृतीया 2026: अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को, बन रहा है विशेष संयोग में न चूकें दान करना यह हैं सुनहरा मौका

श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम

Naam Jap – प्रेमानंद जी महाराज से के एन राव तक: आखिर क्यों आज की पीढ़ी के बीच ‘नाम जप’ बन रहा है महामंत्र?


डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।

<img class=”alignnone size-large wp-image-10274″ src=”https://www.mokshbhumi.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG_20250405_090833-1024×642.webp” alt=”” width=”960″ height=”602″ /


विशिष्ट जानकारियां

Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र

Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता

Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध

Parshuram : विष्णु अवतार होने के बाद भी क्यों नहीं होती परशुराम जी की पूजा ? जानें इनके जीवन से जुड़ी 5 अनसुनी बातें

Akshy Tritiya : त्रेतायुग के प्रारंभ का दिन अक्षय तृतीया क्यों है ख़ास, जानिए किन चीजों का करना चाहिए दान और क्यों..

हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना

Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?

Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?

Hanuman rahasy : क्या है हनुमान क़े जीवित होने की कथा संग जानिए उनके बंदर, जन्म, निवास, सिंदूर और पत्नी का नाम से जुड़ी 9 रहस्य

Powerful Hanuman Mantra : समस्या या संकट से हों परेशान, तो करें इस मंत्र का जाप, परेशानियों पर सीधा चलेगा बजरंग बाण

Duj ka chand : दूज का चांद क्यों होता है खास, क्यों करते हैं द्वितीया के चंद्र का दर्शन, मुसलमानों का संबंध

Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ

यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..

आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह

Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव

Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?

आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र

जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?

Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं ‘खिचड़ी’ ? क्या है इसके पीछे का कारण ? जानिए किन किन ग्रहों का होता है कनेक्शन

Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा

शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन

जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व

अयोध्या के 5 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के बाद काशी के पंचकोशी क्षेत्र को मांस मदिरा से मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग तेज, cm को लिखा पत्र

Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?

जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?

भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में

Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..

वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें

हनुमान जन्मोत्सव : भगवान शिव के 11वाँ रूद्र अवतार प्रभू हनुमान का दो बार क्यों मनाया जाया है जन्मोत्सव, जानिए इससे जुड़ी कथा

Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता




चाणक्य की बातें

चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …

Chanakya ki bat : जीवन में होने लगे ऐसी घटनाएं तो समझ लें मां लक्ष्मी हैं क्रोधित, आर्थिक संकट है नजदीक

थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए


कथाएं रामायण की ..

Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण


कथाएं महाभारत की ..

Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?

महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को

Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?

क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें

जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला

जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…

कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र

महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध

जानिए पांडवो के स्वर्ग जाने की कथा, किन वजहों से पांचो पांडव बारी बारी नीचे गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए

निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..


Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.


Author: Admin Editor MBC

Leave a Reply