नवरात्रि विशेष : मां कुष्मांडा और काशी के दुर्गाकुंड का रहस्य, राजा सुदर्शन की अटूट भक्ति और मां के प्रगट होने की कथा
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि की चतुर्थ तिथि को जगतजननी के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा के दर्शन और पूजन का विधान है। मां कुष्मांडा को अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड की रचना करने वाली आदि शक्ति माना जाता है।
देशभर में मां कुष्मांडा के कई मंदिर हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) स्थित दुर्गाकुंड का मंदिर अपनी ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्ता के लिए पूरी दुनिया में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि यह वही पावन भूमि है जहां राजा सुदर्शन की भक्ति से प्रसन्न होकर मां कुष्मांडा साक्षात प्रकट हुई थीं।
पौराणिक कथा: राजकुमार सुदर्शन और अनजाने में हुआ मंत्र जाप
देवी भागवत पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, अयोध्या के राजा ध्रुवसंधि की दो रानियां थीं—बड़ी रानी मनोरमा और छोटी रानी लीलावती। दोनों ही देवियों की परम भक्त थीं। मनोरमा के पुत्र का नाम राजकुमार सुदर्शन और लीलावती के पुत्र का नाम शत्रुजीत था।
एक बार जब राजा ध्रुवसंधि शिकार के लिए जंगल गए, तो एक शेर के आक्रमण में उनकी मृत्यु हो गई। राजा की मृत्यु के पश्चात महर्षि वशिष्ठ ने राजकुमार सुदर्शन को अयोध्या की राजगद्दी सौंपनी चाही। लेकिन छोटी रानी लीलावती के पिता और उज्जैन के राजा युधाजीत को यह स्वीकार नहीं हुआ। उसने अयोध्या पर आक्रमण कर राज्य को तहस-नहस कर दिया।
बड़ी रानी मनोरमा किसी तरह अपने पुत्र राजकुमार सुदर्शन और मंत्री विट्ठल के साथ राजमहल से बचकर महर्षि भारद्वाज के आश्रम में पहुंच गईं और वहीं शरण ली।
’क्लीं’ बीज मंत्र का चमत्कार
आश्रम में रहते हुए एक दिन राजकुमार सुदर्शन अन्य बालकों के साथ खेल रहे थे। खेल-खेल में अन्य बच्चे मंत्री विट्ठल को ‘क्लिब-क्लिब’ कहकर चिढ़ाने लगे (संस्कृत में ‘क्लिब’ का अर्थ नपुंसक होता है)।
बालक सुदर्शन को लगा कि वे ‘क्लीं-क्लीं’ कह रहे हैं। चूंकि ‘क्लीं’ मां भगवती का अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र है, इसलिए सुदर्शन उसे खेल-खेल में ही सही उच्चारण समझकर जपने लगे। इस अनन्य और निरंतर जाप से जगतजननी मां भगवती अत्यंत प्रसन्न हुईं।
काशी नरेश की कन्या शशिकला से विवाह और मां कुष्मांडा का प्राकट्य
माता भगवती ने काशी नरेश की कन्या शशिकला को स्वप्न में दर्शन दिए और राजकुमार सुदर्शन से विवाह करने का आदेश दिया। नियत समय पर शशिकला के लिए स्वयंवर का आयोजन किया गया।
जब राजकुमार सुदर्शन और शशिकला का विवाह तय हुआ, तो शत्रु पक्ष के राजा युधाजीत ने अपनी सेना के साथ स्वयंवर स्थल पर आक्रमण कर दिया। चारों तरफ से खुद को घिरा देखकर राजकुमार सुदर्शन ने पूरी श्रद्धा से मां भगवती का ध्यान किया।
भक्त की पुकार सुनते ही मां कुष्मांडा साक्षात प्रकट हुईं और उन्होंने युधाजीत की विशाल सेना का संहार कर दिया। मां के आशीर्वाद से राजकुमार सुदर्शन विजयी हुए और उनका विवाह काशी नरेश की पुत्री शशिकला के साथ संपन्न हुआ। इसके बाद मां की कृपा से सुदर्शन अयोध्या के प्रतापी राजा बने।
काशी के दुर्गाकुंड में मां का स्थायी निवास
युद्ध और संकट टलने के बाद राजा सुदर्शन ने मां कुष्मांडा से प्रार्थना की कि वे काशी नगरी में ही सदा के लिए विराजमान हो जाएं, ताकि इस पावन नगरी के भक्तों का कल्याण हो सके।
भक्त की इस अचल प्रार्थना से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने काशी के दुर्गाकुंड क्षेत्र को अपना धाम बनाया और वहीं सदा के लिए स्थापित हो गईं।
आज यही पावन स्थल दुर्गाकुंड मंदिर (मां कुष्मांडा मंदिर) के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर अत्यंत सिद्ध पीठ है। नवरात्रि के चौथे दिन या किसी भी सामान्य मंगलवार और शुक्रवार को जो भी भक्त सच्चे मन और भाव से मां कुष्मांडा के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
नवरात्रि विशेष में अब तक आपने पढ़ा…
नवरात्रि विशेष : नवरात्रि की पहली देवी शैलपुत्री की कथा
Shardiiya Navratra: जानिये किसने शुरू किया नवरात्रि व्रत, इतिहास, महत्त्व तथा शास्त्र !
लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप्प से जुड़े। साथ ही “मोक्ष भूमि” के वेबसाइट, facebook, YouTube, Instagram सहित अन्य सोशल मीडिया पर …
विशेष आलेख श्रृंखला “पितृपक्ष”
पितृपक्ष विशेष 09: जानिए पितृ ऋण से मुक्ति और आत्मिक शांति के 4 महान तीर्थ
विशेष आलेख श्रृंखला 04 : इन परहेजों और नियमों का पालन करते हुए करना चाहिए श्राद्धकर्म ?
विशेष में पितृपक्ष -2 : जानिए क्या है पितृ दोष ? कारण, लक्षण और मुक्ति के शास्त्रोक्त सिद्ध उपाय
विशेष श्रृंखला : जानिए क्या है नान्दी श्राद्ध और क्यों हैं हर शुभ कार्य से पहले यह अनिवार्य
विशेष श्रृंखला त्रिपिंडी श्राद्ध
त्रिपिंडी श्राद्ध 4 : जानिए क्या है अकाल मृत्यु, इसके बाद किन जगहों पर जाती है आत्मायें
त्रिपिंडी श्राद्ध -5 : अकाल मृत्यु के बाद अतृप्त आत्माओं को परम शांति और मोक्ष कैसे…
त्रिपिंडी श्राद्ध : जानिए..गरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मृत्यु के बाद आत्मा का सफर
इन अनुष्ठान से जुड़ी कोई जानकारी या शंका समाधान के लिए “मोक्ष भूमि” के 9889940000 व्हाट्सएप नंबर से निशुल्क या अपने कर्मकांडी ब्राम्हण/विद्वान् से सलाह लेना चाहिए।
आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि अलग अलग भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की धार्मिक जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।

“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला
भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..
फाइव लेटेस्ट पोस्ट
श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम
डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।
<img class=”alignnone size-large wp-image-10274″ src=”https://www.mokshbhumi.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG_20250405_090833-1024×642.webp” alt=”” width=”960″ height=”602″ /
विशिष्ट जानकारियां
Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र
Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता
Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध
हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना
Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?
Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?
Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ
यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..
आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह
Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?
आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र
जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?
Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा
शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन
जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व
Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?
जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?
भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में
Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..
वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें
Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता
चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.






Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.