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क्या आपकी कुंडली में भी है ‘नाड़ी दोष’? जानिए इसका सच और अचूक उपाय!

संकलन- डॉ संतोष ओजा

सनातन धर्म में विवाह को केवल दो इंसानों का नहीं, बल्कि दो आत्माओं का मिलन माना जाता है। इसीलिए हमारे शास्त्रों में विवाह से पहले कुंडली मिलान, खासकर अष्टकूट मिलान को बेहद जरूरी बताया गया है। लेकिन जब भी कुंडली मिलान की बात आती है, तो एक शब्द सुनकर अक्सर लोग घबरा जाते हैं—और वो है “नाड़ी दोष”।

​आज आपके पसंदीदा धार्मिक चैनल “मोक्ष भूमि” के इस जानकारी को हम जानेंगे कि आखिर नाड़ी दोष क्या है, वैवाहिक जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, और शास्त्रों में इसके क्या उपाय बताए गए हैं।

​1. क्या होता है नाड़ी दोष? (Nadi Dosha Explained)

​ज्योतिष शास्त्र में आठ कूटों (गुणों) में से ‘नाड़ी’ को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिसके कुल 8 अंक होते हैं। नाड़ियां तीन प्रकार की होती हैं:

​आदि नाड़ी (Vata)
​मध्य नाड़ी (Pitta)
​अंत्य नाड़ी (Kapha)

​नियम: वर और वधू दोनों की नाड़ी अलग-अलग होनी चाहिए। यदि दोनों की नाड़ी एक ही हो (जैसे दोनों की आदि, दोनों की मध्य या दोनों की अंत्य), तो कुंडली में ‘नाड़ी दोष’ लग जाता है और मिलने वाले 8 अंकों में से ‘शून्य’ (0) अंक प्राप्त होता है।

​2. वैवाहिक जीवन पर इसका प्रभाव

​शास्त्रों के अनुसार, समान नाड़ी होने पर वर-वधू के विचार और शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) एक जैसी हो जाती है, जिससे निम्नलिखित समस्याएं आ सकती हैं:

​स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां: पति-पत्नी में से किसी एक या दोनों का स्वास्थ्य अक्सर खराब रह सकता है।
​संतान सुख में बाधा: मुख्य रूप से आदि और मध्य नाड़ी दोष में संतान प्राप्ति में देरी या गर्भधारण में समस्याएं आ सकती हैं।

​वैचारिक मतभेद: गंभीर मामलों में आपसी प्रेम कम होने लगता है और अकारण क्लेश बढ़ता है।

​3. नाड़ी दोष से जुड़े भ्रम और सत्य

​अक्सर लोग नाड़ी दोष का नाम सुनते ही रिश्ता तोड़ देते हैं, जो कि पूरी तरह सही नहीं है। आइए जानते हैं इसका सच:
​भ्रम: नाड़ी दोष होने पर विवाह कभी सफल नहीं हो सकता।

​सत्य (परिहार): ज्योतिष शास्त्र में ‘नाड़ी दोष का परिहार’ (अपवाद) भी बताया गया है। यदि वर-वधू दोनों का जन्म एक ही नक्षत्र में हुआ हो लेकिन चरण अलग हों, या दोनों की राशि एक हो पर नक्षत्र अलग हों, तो नाड़ी दोष स्वतः ही समाप्त हो जाता है। साथ ही, ब्राह्मणों के अलावा अन्य वर्णों में इसका प्रभाव बेहद कम या नगण्य माना जाता है।

​4. शास्त्रों में बताए गए अचूक उपाय

​यदि कुंडली में नाड़ी दोष गंभीर है और परिहार नहीं हो रहा है, तो शास्त्रों में इसके निवारण के उपाय भी दिए गए हैं:

​महामृत्युंजय मंत्र का जाप: विवाह से पूर्व या पश्चात वर-वधू को सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र का जाप करवाना चाहिए।

​नाड़ी दोष निवारण पूजा: किसी योग्य पंडित से विधि-विधान से नाड़ी दोष शांति पूजा कराएं।

​दान-पुण्य: स्वर्ण दान, गाय का दान (गौदान), या किसी गरीब कन्या के विवाह में गुप्त दान करने से इस दोष का प्रभाव खत्म होता है।

​भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा: नियमित रूप से शिव-पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

कुंडली का मिलना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है दो मनों का मिलना और एक-दूसरे के प्रति सम्मान। यदि आपकी कुंडली में भी नाड़ी दोष है, तो डरें नहीं, बल्कि शास्त्रों में बताए गए उपायों को अपनाएं।
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Author: Admin Editor MBC

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