Home 2026 चण्डिका जयन्ती: शत्रुओं पर विजय और आरोग्यता के लिए इस विधि से करें माँ की आराधना

" मोक्ष भूमि " आपका अभिनंदन करता हैं। धार्मिक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहिये।   निवेदन : " मोक्षभूमि " डेस्क को 9889940000 पर व्हाट्सअप कर निशुल्क ज्योतिष,वास्तु, तीज - त्यौहार और व्रत या अन्य समस्या का समाधान पूछ सकते हैं।

चण्डिका जयन्ती: शत्रुओं पर विजय और आरोग्यता के लिए इस विधि से करें माँ की आराधना


काशी | मोक्ष भूमि आध्यात्मिक डेस्क:

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि, शुक्रवार, 01 मई 2026 को शक्ति, पराक्रम और दुष्टों का संहार करने वाली देवी चण्डिका की जयन्ती अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। माँ चंडिका को दुर्गा सप्तशती की प्रमुख देवी माना जाता है, जो महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का एकीकृत स्वरूप हैं।

भय और बाधाओं का नाश करती हैं माँ चंडिका

शास्त्रों के अनुसार, माँ चंडिका की उग्रता उनके भक्तों के लिए सुरक्षा कवच के समान है। वे केवल दुष्टों और अधर्मियों के लिए रौद्र रूप धारण करती हैं, जबकि अपने भक्तों के लिए वे ममतामयी और वरदान देने वाली जननी हैं। उनकी आराधना से न केवल शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, बल्कि साधक को अदम्य साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

द्वादशासु विद्यासु चण्डिका सिद्धिदायिनी।
भयार्तानां भयानाशा सर्वसिद्धिप्रदायिनी॥

माँ चंडिका स्तुति: विजय और सौभाग्य का मंत्र

इस पावन अवसर पर चंडिका स्तुति का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है।

बीज मंत्र: ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

स्तुति के मुख्य अंश:

“जयति जय जय माँ चंडिके, जयति चंडी हे देवा।
दुष्टों का संहारिणी, भक्तों की करती सेवा॥”

“देहि सौभाग्यमारोग्यं, देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि॥”

“ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥”

पूजन विधि और नियम

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चण्डिका जयन्ती पर निम्नलिखित विधि से पूजन करना चाहिए:

शुद्धि: स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर शांत मन से पूजा का संकल्प लें।

स्थापना: माँ चंडिका या दुर्गा जी की मूर्ति/चित्र को चौकी पर स्थापित करें।

दीप-पुष्प: घी का दीपक जलाएं और माता को प्रिय लाल रंग के पुष्प (गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें।

प्रसाद: नारियल, लाल मिठाई या सात्विक नैवेद्य का भोग लगाएं।

समय: शाम को सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल) किया गया पाठ विशेष शुभ होता है।

क्यों करें चंडिका उपासना? (प्रमुख लाभ)

नकारात्मकता का नाश: घर और जीवन से बुरी नजर व तंत्र-बाधाओं का अंत होता है।

आर्थिक समृद्धि: महालक्ष्मी स्वरूप होने के कारण माँ धन-धान्य के भंडार भरती हैं।
आरोग्य लाभ: शारीरिक रोगों और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
संकट निवृत्ति: जीवन में आने वाली हर बाधा को माँ अपने त्रिशूल से नष्ट कर देती हैं।

इस शुक्रवार, श्रद्धा भाव से माँ चंडिका का पूजन कर आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और शक्ति का संचार कर सकते हैं।


“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला

भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..


लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़िए…


 आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि 12 भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की यह जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।



फाइव लेटेस्ट पोस्ट

Marriage special : सात फेरे या सात जन्मों का रहस्य? जानिए सनातनी विवाह की उन रस्मों का सच, जिनसे आज भी अनजान हैं आप!

अक्षय तृतीया विशेष: क्यों भगवान परशुराम ने किया था अपनी माता का वध? जानें अहंकार और न्याय की यह अद्भुत कथा

अक्षय तृतीया 2026: अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को, बन रहा है विशेष संयोग में न चूकें दान करना यह हैं सुनहरा मौका

श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम

Naam Jap – प्रेमानंद जी महाराज से के एन राव तक: आखिर क्यों आज की पीढ़ी के बीच ‘नाम जप’ बन रहा है महामंत्र?


डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।


विशिष्ट जानकारियां

Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र

Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता

Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध

Parshuram : विष्णु अवतार होने के बाद भी क्यों नहीं होती परशुराम जी की पूजा ? जानें इनके जीवन से जुड़ी 5 अनसुनी बातें

Akshy Tritiya : त्रेतायुग के प्रारंभ का दिन अक्षय तृतीया क्यों है ख़ास, जानिए किन चीजों का करना चाहिए दान और क्यों..

हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना

Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?

Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?

Hanuman rahasy : क्या है हनुमान क़े जीवित होने की कथा संग जानिए उनके बंदर, जन्म, निवास, सिंदूर और पत्नी का नाम से जुड़ी 9 रहस्य

Powerful Hanuman Mantra : समस्या या संकट से हों परेशान, तो करें इस मंत्र का जाप, परेशानियों पर सीधा चलेगा बजरंग बाण

Duj ka chand : दूज का चांद क्यों होता है खास, क्यों करते हैं द्वितीया के चंद्र का दर्शन, मुसलमानों का संबंध

Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ

यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..

आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह

Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव

Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?

आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र

जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?

Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं ‘खिचड़ी’ ? क्या है इसके पीछे का कारण ? जानिए किन किन ग्रहों का होता है कनेक्शन

Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा

शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन

जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व

अयोध्या के 5 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के बाद काशी के पंचकोशी क्षेत्र को मांस मदिरा से मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग तेज, cm को लिखा पत्र

Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?

जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?

भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में

Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..

वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें

हनुमान जन्मोत्सव : भगवान शिव के 11वाँ रूद्र अवतार प्रभू हनुमान का दो बार क्यों मनाया जाया है जन्मोत्सव, जानिए इससे जुड़ी कथा

Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता




चाणक्य की बातें

चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …

Chanakya ki bat : जीवन में होने लगे ऐसी घटनाएं तो समझ लें मां लक्ष्मी हैं क्रोधित, आर्थिक संकट है नजदीक

थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए

कथाएं रामायण की ..

Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण


कथाएं महाभारत की ..

Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?

महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को

Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?

क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें

जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला

जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…

कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र

महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध

जानिए पांडवो के स्वर्ग जाने की कथा, किन वजहों से पांचो पांडव बारी बारी नीचे गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए

निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..


Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.


Author: Admin Editor MBC

Leave a Reply