महापुण्यदायी संयोग: 7 जून को रविवारी सप्तमी का महायोग, सूर्यग्रहण के समान मिलेगा फल; जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
सनातन धर्म में कुछ तिथियों और वारों के मेल से ऐसे अद्भुत संयोग बनते हैं, जिनमें किया गया छोटा सा भी धार्मिक कार्य अक्षय फल प्रदान करता है। ऐसा ही एक परम पवित्र और दुर्लभ योग कल यानी 07 जून 2026, रविवार को बनने जा रहा है। कल पूरे दिन और रात्रि 9:29 तक ‘भानुसप्तमी’ (रविवारी सप्तमी) का महायोग रहेगा। शास्त्रानुसार, इस विशेष दिन पर की गई पूजा-अर्चना और मंत्र जप का फल सूर्यग्रहण के समय किए गए जप के समान ही अनंत गुना होता है।
सूर्यग्रहण के समान फलदायी हैं ये चार तिथियाँ
हमारे शास्त्रों में चार प्रकार के तिथि-वार संयोगों को सूर्यग्रहण के समतुल्य (बराबर) माना गया है:
1. सोमवती अमावस्या
2. रविवारी सप्तमी (भानुसप्तमी)
3. मंगलवारी चतुर्थी
4. बुधवारी अष्टमी
शास्त्रों का वचन है: इन विशेष तिथियों में किया गया जप, ध्यान, पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध कभी क्षय नहीं होता, यानी इसका पुण्य जीवनभर और उसके बाद भी आत्मा के साथ रहता है।
घातक बीमारियों से मुक्ति दिलाता है रविवारी सप्तमी का व्रत
रविवारी सप्तमी के दिन भगवान सूर्य नारायण की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन यदि कोई व्यक्ति बिना नमक और मिर्च का भोजन (एकभुक्त या फलाहार) करके सूर्य देव का व्रत और पूजन करता है, तो उसके शरीर के असाध्य और घातक रोग भी दूर हो जाते हैं।
यदि कोई रोगी स्वयं यह व्रत या नियम करने में असमर्थ है, तो परिवार का कोई अन्य सदस्य उस बीमार व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ यह व्रत और संकल्प कर सकता है।
सूर्य भगवान की सरल पूजन विधि
कल सुबह स्नान के बाद उगते हुए सूर्य देव की आराधना निम्नलिखित विधि से करें:
दीपदान व आरती: सूर्य भगवान के सम्मुख तिल के तेल का दीपक जलाएं, उन्हें धूप-दीप दिखाएं और पूरी श्रद्धा से उनकी आरती करें।
अर्घ्य दान: तांबे के पात्र में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़े चावल, शक्कर, गुड़, लाल फूल या लाल कुंकुम (रोली) मिलाएं और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
भगवान सूर्य के 13 दिव्य अर्घ्य मंत्र
अर्घ्य देते समय या उसके पश्चात सूर्य देव के इन 13 नामों का उच्चारण करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है:
1. ॐ मित्राय नमः।
2. ॐ रवये नमः।
3. ॐ सूर्याय नमः।
4. ॐ भानवे नमः।
5. ॐ खगाय नमः।
6. ॐ पूष्णे नमः।
7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
8. ॐ मरीचये नमः।
9. ॐ आदित्याय नमः।
10. ॐ सवित्रे नमः।
11. ॐ अर्काय नमः।
12. ॐ भास्कराय नमः।
13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।
मोक्ष भूमि की विशेष अपील
रविवार सप्तमी का यह अद्भुत संयोग आत्म-कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का स्वर्णिम अवसर है। कल के दिन व्यर्थ के विवादों और तामसिक भोजन से दूर रहकर अधिक से अधिक समय मौन, भगवद्-चिंतन और गुरु-मंत्र के जप में बिताएं।
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