जानिए क्या हैं ‘अधिमास’, कैसे होती हैं इसकी गणना, क्यों 17 मई से 15 जून तक थम जाएंगे मांगलिक कार्य, देखें त्योहारों की नई लिस्ट।
– 3 साल बाद ही क्यों आता है अधिकमास? समझें इसका पूरा गणित
– पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर 365 दिन और लगभग 6 घंटे में पूरा करती है। जिसे सौर वर्ष कहते हैं।
साल 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और अनोखा होने जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ (जेठ) के महीने में ‘अधिमास’ यानी ‘पुरुषोत्तम मास’ जारी है। ज्योतिषविदों के अनुसार, यह एक दुर्लभ संयोग है, जिसके कारण इस बार तपती गर्मी और नौतपा वाले जेठ के महीने एक नहीं बल्कि दो होंगे।
गणना कैसे की जाती है
चंद्र वर्ष (लगभग 354 दिन) और सौर वर्ष (लगभग 365 दिन) के बीच के (11) दिनों के वार्षिक अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त माह (अधिकमास) जोड़ा जाता हैं। यह वह चंद्र मास होता है जिसमें सूर्य की कोई ‘संक्रांति’ (राशि परिवर्तन) नहीं होती।
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर और मौसम चक्र सूर्य पर आधारित होता हैं।
अंतर का गणित: चंद्र वर्ष (354) दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष (365) दिनों का होता है। दोनों का यह (11) दिन का अंतर हर तीन साल में लगभग (33) दिन (एक महीने) के बराबर हो जाता है।
अधिक मास का जुड़ना: इस अंतर को पाटने के लिए हर (32) महीने और (16) दिन बाद पंचांग में एक तेरहवां महीना जोड़ा जाता है। इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ या ‘मलमास’ भी कहते हैं।
नियम: जिस चंद्र मास में सूर्य किसी भी नई राशि में प्रवेश (संक्रांति) नहीं करता, उस महीने को अधिमास घोषित कर दिया जाता है।
त्योहारों को शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष कैसे मनाते हैं?
हिंदू मास (30) दिनों का होता है, जिसे चंद्रमा की कलाओं के आधार पर (15-15) दिनों के दो पक्षों (भागों) में बाँटा जाता है
शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) अमावस्या के बाद चंद्रमा का आकार प्रतिदिन बढ़ता है (जिसे दूज, तीज आदि कहते हैं) और पूर्णिमा के दिन यह पूरा (गोल) हो जाता है। ज्यादातर मुख्य त्योहार (जैसे दिवाली, होली, रक्षाबंधन) शुक्ल पक्ष में मनाए जाते हैं, क्योंकि इन दिनों रातें चांदनी भरी और शुभ मानी जाती हैं।
कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा): पूर्णिमा के बाद चंद्रमा का आकार प्रतिदिन छोटा होने लगता है (अंधेरी रातें) और अमावस्या के दिन पूरी तरह छिप जाता है। इस पक्ष में मुख्य रूप से श्राद्ध (पितृ पक्ष) और साधना से जुड़े त्योहार (जैसे महाशिवरात्रि या कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत) मनाए जाते हैं।
शुक्ल पक्ष, कृष्ण पक्ष क्या है?
हर महीने में दो पक्ष होते हैं — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, जो विकास, सकारात्मकता और नई शुरुआत का संकेत देता है। वहीं कृष्ण पक्ष 14 दिन के रात और दिन होते हैं।
हिंदू कैलेंडर:क्या होते हैं शुक्ल और कृष्ण पक्ष, कैसी की जाती है इसकी गणना
चंद्रमा के आकार और प्रकाश में कमी आने से रातें अंधेरी होने लगती है। इस कारण से भी कृष्ण पक्ष को उतना शुभ नहीं माना जाता। अमावस्या और पूर्णिमा के बीच वाले भाग को अधिकमासकहते हैं।
अधिकमास कैसे बन गया पुरुषोत्तम
जिस चंद्र मास में संक्रांति नहीं होती, उसे अधिमास या मलमास कहते हैं। हर तीन वर्ष पश्चात आने वाले इस मास को पुरुषोत्तम मास (17 मई से 15 जून) भी कहा जाता है।
अधिकमास का क्या अर्थ है?
पहला महीना ‘अधिक ज्येष्ठ मास’ (मलमास) कहलाएगा, जो 17 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इसके ठीक बाद ‘शुद्ध (निज) ज्येष्ठ मास’ की शुरुआत होगी। इस बदलाव के कारण सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों की तारीखों और उनकी गणना को लेकर लोगों में काफी असमंजस है। आइए जानते हैं कि इस बार त्योहार कब और कैसे मनाए जाएंगे।
मलमास का नियम: अधिमास में क्यों नहीं मनाए जाएंगे मुख्य त्योहार?
शास्त्रों के अनुसार, अधिमास या मलमास की अवधि में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे—विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ आदि पूरी तरह वर्जित होते हैं। इसके साथ ही, सालभर में आने वाले प्रमुख और पारंपरिक त्योहारों को भी मलमास के दौरान नहीं मनाया जाता है।
यही वजह है कि जेठ के प्रमुख त्योहार जैसे गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी इस बार जून के उत्तरार्ध (आधे जून के बाद) में मनाए जाएंगे, जब शुद्ध ज्येष्ठ मास की शुरुआत होगी। मलमास के दौरान केवल भगवान विष्णु की आराधना और इस महीने की अपनी विशेष एकादशियों का व्रत ही रखा जाएगा।
जेठ के प्रमुख त्योहारों की पूरी लिस्ट (2026)
पंचांग गणना के अनुसार, इस साल जेठ के महीने में पड़ने वाले व्रतों और त्योहारों की सटीक तारीखें इस प्रकार हैं:
वट सावित्री व्रत: 16 मई 2026 (अधिमास शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, सुहागिनें इस दिन व्रत रखेंगी)।
पद्मिनी एकादशी: 27 मई 2026 (अधिकमास की पहली विशेष एकादशी, भगवान विष्णु की कृपा पाने का दिन)।
पुरुषोत्तम पूर्णिमा: 31 मई 2026 (मलमास की मुख्य पूर्णिमा, इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है)।
परमा एकादशी: 11 जून 2026 (अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी)।
सोमवती अमावस्या: 15 जून 2026 (इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के साथ ही अधिमास का समापन हो जाएगा)।
गंगा दशहरा: 25 जून 2026 (शुद्ध ज्येष्ठ मास शुरू होने के बाद मां गंगा का अवतरण दिवस मनाया जाएगा)।
निर्जला एकादशी: 25/26 जून 2026 (साल की सबसे कठिन और बड़ी एकादशी, इस बार जून के आखिरी हफ्ते में पड़ेगी)।
वट पूर्णिमा व्रत: 27 जून 2026 (शुद्ध ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के साथ जेठ का महीना समाप्त होगा)।
दान और आध्यात्म के लिए ‘अमृत’ है यह महीना
ज्योतिषविदों का कहना है कि भले ही इस महीने में मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है, लेकिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए इसे ‘अमृत काल’ माना जाता है। चूंकि इस महीने के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं, इसलिए इस 30 दिनों की अवधि में विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और पीले अनाज, फल व वस्त्रों का दान करने से कई गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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