Home 2026 समुद्र-मंथन से निकलीं माता लक्ष्मी की बड़ी बहन ‘दरिद्रा’, जानिए क्यों भागती हैं भगवान के नाम

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समुद्र-मंथन से निकलीं माता लक्ष्मी की बड़ी बहन ‘दरिद्रा’, जानिए क्यों भागती हैं भगवान के नाम से दूर और कहाँ है इनका पक्का ठिकाना!

डॉ संतोष ओझा | काशी

समुद्र-मंथन की कथा तो हम सबने सुनी है, जिससे अमृत और माता लक्ष्मी प्रकट हुईं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी से ठीक पहले एक और देवी प्रकट हुई थीं, जिन्हें ‘दरिद्रा’ या ‘ज्येष्ठा’ कहा जाता है? जी हां, ये माता लक्ष्मी की बड़ी बहन हैं, लेकिन इनका स्वभाव और ठिकाना बिल्कुल विपरीत है।

​आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों दरिद्रा भगवान के नाम से कोसों दूर भागती हैं और महर्षि मार्कण्डेय व स्वयं भगवान विष्णु ने उन्हें किन स्थानों पर राज करने का अधिकार दिया है।

​ जब मंत्रोच्चार सुनकर कान बंद कर भागने लगीं ज्येष्ठा!
​पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र-मंथन से प्रकट होने के बाद ज्येष्ठा का विवाह दुःसह नामक ब्राह्मण से हुआ। विवाह के बाद जब दोनों लोक-लोकांतरों में घूमने निकले, तो एक अजीब घटना हुई। जहाँ भी भगवान का नाम लिया जाता, यज्ञ-हवन होते या वेदपाठ गूँजता, ज्येष्ठा डर के मारे अपने दोनों कान बंद कर लेतीं और वहाँ से भाग खड़ी होतीं। चारों तरफ धर्म का बोलबाला देखकर वह बुरी तरह थक गईं।

​महर्षि मार्कण्डेय का बड़ा खुलासा: इन घरों में भूलकर भी न जाएं दुःसह और ज्येष्ठा

​परेशान होकर जब दुःसह मुनि ने महर्षि मार्कण्डेय से मार्गदर्शन मांगा, तो महर्षि ने स्पष्ट शब्दों में कुछ जगहों पर जाने की सख्त मनाही की।

इन स्थानों से दूर रहती हैं दरिद्रा (ज्येष्ठा):

​शिव भक्तों के पास: जहाँ रुद्र के भक्त और भस्म धारण करने वाले रहते हों।

​हरि-हर कीर्तन: जहाँ नारायण, गोविंद, शंकर और महादेव के नामों का कीर्तन होता हो (क्योंकि वहाँ भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र रक्षा करता है)।

​पवित्र घर: जिस घर में रोज़ पूजा-पाठ, वेदघोष, स्वाहा-वषट्कार होता हो और जहाँ गौमाता की सेवा होती हो।

तो कहाँ होता है दरिद्रा का पक्का वास?

​महर्षि मार्कण्डेय और स्वयं भगवान विष्णु ने ज्येष्ठा को रहने और अपनी जीविका चलाने के लिए कुछ खास स्थान सौंपे हैं। अगर आपके घर में भी ये लक्षण हैं, तो संभल जाइए:

​गृह क्लेश और निंदा: जिस घर में पति-पत्नी में रोज़ झगड़े होते हैं और भगवान की निंदा होती है।
​स्वार्थी लोग: जहाँ माता-पिता बच्चों को छोड़कर खुद अकेले सब कुछ भोग लेते हैं।

​अशुद्धता और कुसंस्कार: जो लोग स्नान-ध्यान नहीं करते, गंदे कपड़े पहनते हैं, जुआ खेलते हैं, पराये धन और पराई स्त्री पर नज़र रखते हैं।

​गलत आदतें: जो लोग शाम के समय (संध्याकाल) सोते या भोजन करते हैं।

भगवान विष्णु ने दिया विशेष वरदान, इस एक चीज़ से डरती हैं दरिद्रा!

​जब दुःसह मुनि ज्येष्ठा को एक पीपल के पेड़ के नीचे छोड़कर रसातल चले गए, तब अनाथ ज्येष्ठा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ प्रकट हुए। नारायण ने ज्येष्ठा को ढाँढस बंधाते हुए एक बड़ा अधिकार दिया:
​”जो लोग माता पार्वती, भगवान शंकर और मेरे भक्तों की निंदा करते हैं, उनके समस्त धन पर तुम्हारा अधिकार होगा। यहाँ तक कि जो लोग शिव जी की बुराई करके मेरी पूजा करते हैं, उनका धन भी तुम्हारा ही होगा।”

दरिद्रा से बचने का अचूक उपाय

​जाते-जाते दुःसह मुनि अपनी पत्नी ज्येष्ठा को एक गुप्त बात बता गए थे—”जो भी स्त्री पुष्प, धूप आदि से तुम्हारी (ज्येष्ठा की) पूजा करेगी, तुम उसके घर में कभी प्रवेश मत करना।” यही कारण है कि आज भी लोग दरिद्रता को घर से दूर रखने के लिए पीपल के वृक्ष की पूजा और विशेष उपाय करते हैं।

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Author: Admin Editor MBC

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