Home 2026 Narsingh Jayanti : काशी के ‘रक्षक’ एकादश नृसिंह—एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा जो काट देती है जन्मों के बंधन

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Narsingh Jayanti : काशी के ‘रक्षक’ एकादश नृसिंह—एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा जो काट देती है जन्मों के बंधन

​ डॉ संतोष ओझा | काशी | मोक्ष भूमि डेस्क

जब अन्याय और अधर्म की सीमाएं लांघ दी गईं, तब खंभे को चीरकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह प्रकट हुए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोक्षदायिनी काशी में भगवान नृसिंह केवल एक मंदिर में नहीं, बल्कि 11 विशिष्ट स्वरूपों में विराजमान हैं? ‘काशीखण्ड’ के अनुसार, स्वयं भगवान विष्णु ने इन स्वरूपों की स्थापना और इनके माहात्म्य की व्याख्या की है।

​आज नरसिंह जयंती के पावन पर्व पर, आइए जानते हैं काशी के उन गुप्त और जाग्रत नृसिंह विग्रहों के बारे में, जिनकी पूजा मात्र से अकाल मृत्यु टल जाती है और दरिद्रता का नाश होता है।

१. संकटों के संहारक: विदारनृसिंह और लक्ष्मीनृसिंह

​काशी के उत्तरी भाग में प्रह्लाद घाट के समीप विदारनृसिंह विराजमान हैं। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘विदारण’ का अर्थ है फाड़ना या नष्ट करना। यह विग्रह काशी में आने वाले विघ्नों को दूर करता है। वहीं, गोपीगोविन्द क्षेत्र में स्थित लक्ष्मीनृसिंह का महात्म्य निराला है। यहाँ भगवान केवल धन ही नहीं, बल्कि ‘मोक्षलक्ष्मी’ प्रदान करते हैं। मान्यता है कि यहाँ के तीर्थ में स्नान करने वाले के घर से स्वयं लक्ष्मी कभी विदा नहीं होतीं।

२. मृत्यु और भय पर विजय: निर्वाण, महाबल और महाभय नृसिंह

​काशी में मृत्यु का भय नहीं होता, क्योंकि यहाँ स्वयं भगवान नृसिंह पहरा देते हैं:

निर्वाणनृसिंह: पुलस्त्येश्वर के समीप स्थित इस विग्रह का दर्शन मोक्ष (निर्वाण) की राह आसान बनाता है।

महाबल नृसिंह: ओंकारेश्वर क्षेत्र में स्थित यह स्वरूप उन लोगों के लिए विशेष है जिन्हें अकाल मृत्यु या यमराज का भय सताता है। इनके उपासक को यमदूतों के दर्शन नहीं होते।

महाभयनृसिंह: पितामहेश्वर के पीछे स्थित यह मंदिर भक्तों के भीतर के अज्ञात भय और मानसिक असुरक्षा को जड़ से मिटा देता है।

३. पापों की अग्नि: प्रचण्ड, अत्युग्र और ज्वालामाली नृसिंह

​पापों के प्रायश्चित के लिए काशी के ये तीन रूप परम फलदायी माने गए हैं:

प्रचण्डनृसिंह: घोर पापों के प्रायश्चित हेतु चण्डभैरव के पास इनकी अर्चना की जाती है।

अत्युग्रनृसिंह: कमलेश्वर महादेव के पश्चिम में स्थित यह विग्रह अत्यंत तेजस्वी है, जो मनुष्य की उग्र पापराशि को क्षण भर में भस्म कर देता है।

ज्वालामाली नृसिंह: ज्वालामुखी देवी के सानिध्य में स्थित यह विग्रह अग्निपुंज के समान है। दर्शन मात्र से जन्म-जन्मान्तर के संचित पाप वैसे ही जल जाते हैं जैसे सूखी घास अग्नि में।

४. बाधाओं का दमन: गिरिनृसिंह, कोलाहल और विटंकनृसिंह

गिरिनृसिंह: देहली विनायक के पास स्थित यह रूप शत्रुओं और बाधाओं के लिए सिंह के समान है। जिस प्रकार सिंह हाथियों का शिकार करता है, वैसे ही यह विग्रह ‘पाप-रूपी हाथियों’ का अंत करता है।

कोलाहलनृसिंह: कंकालभैरव के समीप इनका स्थान है। इनके नाम के प्रभाव से तंत्र-मंत्र और ऊपरी बाधाएं ‘कोलाहल’ करती हुई भाग खड़ी होती हैं।

विटंकनृसिंह: नीलकण्ठ महादेव के पृष्ठ भाग में स्थित यह विग्रह साधकों को अभय और स्थिरता प्रदान करता है।

क्यों खास है इस बार की नरसिंह जयंती?

​इस वर्ष काशी के इन प्राचीन मंदिरों में विशेष ‘पंचामृत अभिषेक’ और ‘सपात्र पूजन’ का आयोजन किया गया है। विद्वानों का मत है कि जो भक्त पूरे मन से इन 11 स्वरूपों का स्मरण करते हुए “नृसिंह गायत्री” का जाप करते हैं, उन्हें शत्रुओं पर विजय और असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है।

​”उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥”

काशी के ये 11 विग्रह केवल पत्थर की मूर्तियाँ नहीं, बल्कि भगवान विष्णु द्वारा काशी की सुरक्षा के लिए नियुक्त ‘दिव्य रक्षक’ हैं। यदि आप काशी में हैं, तो आज के दिन इन विग्रहों की एक झलक पाना आपके जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।

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Author: Admin Editor MBC

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