Narsingh Jayanti : काशी के ‘रक्षक’ एकादश नृसिंह—एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा जो काट देती है जन्मों के बंधन
जब अन्याय और अधर्म की सीमाएं लांघ दी गईं, तब खंभे को चीरकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह प्रकट हुए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोक्षदायिनी काशी में भगवान नृसिंह केवल एक मंदिर में नहीं, बल्कि 11 विशिष्ट स्वरूपों में विराजमान हैं? ‘काशीखण्ड’ के अनुसार, स्वयं भगवान विष्णु ने इन स्वरूपों की स्थापना और इनके माहात्म्य की व्याख्या की है।
आज नरसिंह जयंती के पावन पर्व पर, आइए जानते हैं काशी के उन गुप्त और जाग्रत नृसिंह विग्रहों के बारे में, जिनकी पूजा मात्र से अकाल मृत्यु टल जाती है और दरिद्रता का नाश होता है।
१. संकटों के संहारक: विदारनृसिंह और लक्ष्मीनृसिंह
काशी के उत्तरी भाग में प्रह्लाद घाट के समीप विदारनृसिंह विराजमान हैं। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘विदारण’ का अर्थ है फाड़ना या नष्ट करना। यह विग्रह काशी में आने वाले विघ्नों को दूर करता है। वहीं, गोपीगोविन्द क्षेत्र में स्थित लक्ष्मीनृसिंह का महात्म्य निराला है। यहाँ भगवान केवल धन ही नहीं, बल्कि ‘मोक्षलक्ष्मी’ प्रदान करते हैं। मान्यता है कि यहाँ के तीर्थ में स्नान करने वाले के घर से स्वयं लक्ष्मी कभी विदा नहीं होतीं।
२. मृत्यु और भय पर विजय: निर्वाण, महाबल और महाभय नृसिंह
काशी में मृत्यु का भय नहीं होता, क्योंकि यहाँ स्वयं भगवान नृसिंह पहरा देते हैं:
निर्वाणनृसिंह: पुलस्त्येश्वर के समीप स्थित इस विग्रह का दर्शन मोक्ष (निर्वाण) की राह आसान बनाता है।
महाबल नृसिंह: ओंकारेश्वर क्षेत्र में स्थित यह स्वरूप उन लोगों के लिए विशेष है जिन्हें अकाल मृत्यु या यमराज का भय सताता है। इनके उपासक को यमदूतों के दर्शन नहीं होते।
महाभयनृसिंह: पितामहेश्वर के पीछे स्थित यह मंदिर भक्तों के भीतर के अज्ञात भय और मानसिक असुरक्षा को जड़ से मिटा देता है।
३. पापों की अग्नि: प्रचण्ड, अत्युग्र और ज्वालामाली नृसिंह
पापों के प्रायश्चित के लिए काशी के ये तीन रूप परम फलदायी माने गए हैं:
प्रचण्डनृसिंह: घोर पापों के प्रायश्चित हेतु चण्डभैरव के पास इनकी अर्चना की जाती है।
अत्युग्रनृसिंह: कमलेश्वर महादेव के पश्चिम में स्थित यह विग्रह अत्यंत तेजस्वी है, जो मनुष्य की उग्र पापराशि को क्षण भर में भस्म कर देता है।
ज्वालामाली नृसिंह: ज्वालामुखी देवी के सानिध्य में स्थित यह विग्रह अग्निपुंज के समान है। दर्शन मात्र से जन्म-जन्मान्तर के संचित पाप वैसे ही जल जाते हैं जैसे सूखी घास अग्नि में।
४. बाधाओं का दमन: गिरिनृसिंह, कोलाहल और विटंकनृसिंह
गिरिनृसिंह: देहली विनायक के पास स्थित यह रूप शत्रुओं और बाधाओं के लिए सिंह के समान है। जिस प्रकार सिंह हाथियों का शिकार करता है, वैसे ही यह विग्रह ‘पाप-रूपी हाथियों’ का अंत करता है।
कोलाहलनृसिंह: कंकालभैरव के समीप इनका स्थान है। इनके नाम के प्रभाव से तंत्र-मंत्र और ऊपरी बाधाएं ‘कोलाहल’ करती हुई भाग खड़ी होती हैं।
विटंकनृसिंह: नीलकण्ठ महादेव के पृष्ठ भाग में स्थित यह विग्रह साधकों को अभय और स्थिरता प्रदान करता है।
क्यों खास है इस बार की नरसिंह जयंती?
इस वर्ष काशी के इन प्राचीन मंदिरों में विशेष ‘पंचामृत अभिषेक’ और ‘सपात्र पूजन’ का आयोजन किया गया है। विद्वानों का मत है कि जो भक्त पूरे मन से इन 11 स्वरूपों का स्मरण करते हुए “नृसिंह गायत्री” का जाप करते हैं, उन्हें शत्रुओं पर विजय और असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है।
”उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥”
काशी के ये 11 विग्रह केवल पत्थर की मूर्तियाँ नहीं, बल्कि भगवान विष्णु द्वारा काशी की सुरक्षा के लिए नियुक्त ‘दिव्य रक्षक’ हैं। यदि आप काशी में हैं, तो आज के दिन इन विग्रहों की एक झलक पाना आपके जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।
इन्हें भी पढ़े..
Narasimha Jayanti: संतान पर आने वाले संकट को दूर करने के लिए नरसिंह जयंती पर ऐसे करें पूजा
भगवान नरसिंह का एक ऐसा मंदिर जहां साल में एक बार होते हैं दर्शन
“मोक्ष भूमि” की नई श्रृंखला
भारतीय विवाह की रस्में मुख्यतः तीन भाग में संपन्न होते हैं..विवाह से पहले, विवाह के दिन और विवाह के बाद। “मोक्ष भूमि” से जानिए इनसे जुड़ी एक-एक छोटी बड़ी सभी जानकारियां… पढ़ने के लिए जुड़िये ..
लगातार ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारी हेतु नीचे दी हुई हरी पट्टी को क्लिक कर “मोक्षभूमि” व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़िए…
आप इस ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि 12 भाषा की इस धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि काशी” की यह जानकारी अन्य सनातनी को भी मिल सके।


फाइव लेटेस्ट पोस्ट
श्रीकृष्ण की 8 पटरानियाँ: मात्र कथा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति के 8 दिव्य आयाम
डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।
विशिष्ट जानकारियां
Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र
Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता
Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध
हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना
Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?
Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?
Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ
यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..
आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह
Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?
आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र
जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?
Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा
शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन
जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व
Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?
जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?
भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में
Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..
वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें
Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता


चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.



Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.