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फाल्गुन मास की आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादाशी भी कहते हैं. यह एकादशी होली से पहले मनाई जाती है। इसके बाद से ही रंग गुलाल खेलना शुरू हो जाता है। […]Read more
रंगभरी एकादशी की पूजा विधि – रंगभरी एकादशी के दिन दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नानादि करके पूजा स्थर पर भगवान शिव और माता गौरी की मूर्ति स्थापित करें। – […]Read more
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। काशी में इस दिन बाबा विश्वनाथ का […]Read more
हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार, साल में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती हैं। इन्हीं में से एक है फाल्गुन माह के […]Read more
विशेष : होली है .. शिवार्चनम् के माध्यम से बाबा विश्वनाथ के दरबार लगी हाजिरी, मंदिर में रही भीड़ वीडिओ, काशी में अनोखी होली चिताओं के बीच होली आज रंगभरी […]Read more
रंगभरी एकादशी के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में शिवार्चनम् सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रथम प्रस्तुति सौरव गौरव मिश्रा द्वारा कथक नृत्य के अन्तर्गत शिव वन्दना , आनन्द ताण्डव […]Read more
फाल्गुन माह को रंगों का महीना कहा जाता है। इसी कारण से फाल्गुन माह में पड़ने वाली एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल […]Read more
रंगभरी एकादशी / ग्यारस का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिवजी माता पार्वती को पहली बार काशी में लेकर आए थे। अतः यह […]Read more