Home 2022 डाला छठ व्रत मुहूर्त : जानिए चार दिवसीय महा व्रत का मुहूर्त और किस दिन क्या होता है

" मोक्ष भूमि " आपका अभिनंदन करता हैं। धार्मिक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहिये।   निवेदन : " मोक्षभूमि " डेस्क को 9889940000 पर व्हाट्सअप कर निशुल्क ज्योतिष,वास्तु, तीज - त्यौहार और व्रत या अन्य समस्या का समाधान पूछ सकते हैं।

डाला छठ व्रत मुहूर्त : जानिए चार दिवसीय महा व्रत का मुहूर्त और किस दिन क्या होता है


<hr /

भगवान सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देव माना गया है जिनकी आराधना से जीवन में हर्ष, उमंग, उल्लास व ऊर्जा का संचार होता है। सुख-समृद्धि, खुशहाली के लिए सृष्टि के नियंता भगवान सूर्यदेव की महिमा अनंत है। सूर्यदेव की महिमा में रखने वाला डालाछठ, जिन्हें छठपर्व भी कहते हैं, कार्तिक शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि से कार्तिक शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है।

ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व 28 अक्टूबर, शुक्रवार से 31 अक्टूबर, सोमवार तक चलेगा। भारतवर्ष का एकमात्र का पर्व जिसमें अस्त होते हुए सूर्य की भी आराधना की जाती है।

कार्तिक शुक्ल, चतुर्थी तिथि (28 अक्टूबर, शुक्रवार को प्रात: 10 बजकर 34 मिनट से 29 अक्टूबर, शनिवार को प्रात: 8 बजकर 14 मिनट तक)

प्रथम नियम-संयम –
28 अक्टूबर, शुक्रवार को नहाय खाय

( कार्तिक शुक्ल, पंचमी तिथि (29 अक्टूबर, शनिवार को प्रात: 8 बजकर 14 मिनट से 29 अक्टूबर, शनिवार को अर्धरात्रि के पश्चात् 5 बजकर 51 मिनट तक)

द्वितीय संयम –
(एक समय खरना) – 29 अक्टूबर, शनिवार

कार्तिक शुक्ल, षष्ठी तिथि (29 अक्टूबर, शनिवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 5 बजकर 51 मिनट से
30 अक्टूबर, रविवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 3 बजकर 29 मिनट तक)

.तृतीय संयम-
सूर्यदेव को प्रथम अर्घ – 30 अक्टूबर, रविवार को सायंकाल अस्ताचल (अस्त होते हुए)

कार्तिक शुक्ल, सप्तमी तिथि (30 अक्टूबर, रविवार को अर्धरात्रि के पश्चात 3 बजकर 29 मिनट से 31 अक्टूबर, सोमवार को अर्धरात्रि के पश्चात 1 बजकर 12 मिनट तक)

चतुर्थ एवं अन्तिम संयम –
31 अक्टूबर, सोमवार को प्रात:काल उगते हुए सूर्यदेव को द्वितीय अर्घ देकर छठ व्रत का पारण किया जाएगा।

इन्हें भी पढ़िए..

छठ पर्व की शुरुआत कैसे हुई, कैसे मनाते है यह महापर्व. और आखिर कौन हैं छठी मैया…

इकलौता मंदिर जहां विराजते हैं अपने बहन संग दंड के देवता यमराज

ज़ब गंगा धारण करती हैं यमुना का रूप, काशी के तुलसी घाट पर उमड़ता है जनसमूह

आखिर क्यों कायस्थ 24 घंटे के लिए नही करते कलम का उपयोग, क्या हैं इसके मूल की कथा



खबरों के लिए क्लिक करें – https://innovest.co.in


यदि आप सनातनी है तो काशी की नष्ट हो रही ऊर्जा को बचाने के लिए अभियान में आप के साथ की जरूरत है। कृपया सम्पर्क करें… 9889881111, 8765000123


Author: Admin Editor MBC

Comments are disabled.

error: Content is protected !!