डाला छठ व्रत मुहूर्त : जानिए चार दिवसीय महा व्रत का मुहूर्त और किस दिन क्या होता है

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भगवान सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देव माना गया है जिनकी आराधना से जीवन में हर्ष, उमंग, उल्लास व ऊर्जा का संचार होता है। सुख-समृद्धि, खुशहाली के लिए सृष्टि के नियंता भगवान सूर्यदेव की महिमा अनंत है। सूर्यदेव की महिमा में रखने वाला डालाछठ, जिन्हें छठपर्व भी कहते हैं, कार्तिक शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि से कार्तिक शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है।
ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व 28 अक्टूबर, शुक्रवार से 31 अक्टूबर, सोमवार तक चलेगा। भारतवर्ष का एकमात्र का पर्व जिसमें अस्त होते हुए सूर्य की भी आराधना की जाती है।
कार्तिक शुक्ल, चतुर्थी तिथि (28 अक्टूबर, शुक्रवार को प्रात: 10 बजकर 34 मिनट से 29 अक्टूबर, शनिवार को प्रात: 8 बजकर 14 मिनट तक)
प्रथम नियम-संयम –
28 अक्टूबर, शुक्रवार को नहाय खाय
( कार्तिक शुक्ल, पंचमी तिथि (29 अक्टूबर, शनिवार को प्रात: 8 बजकर 14 मिनट से 29 अक्टूबर, शनिवार को अर्धरात्रि के पश्चात् 5 बजकर 51 मिनट तक)
द्वितीय संयम –
(एक समय खरना) – 29 अक्टूबर, शनिवार
कार्तिक शुक्ल, षष्ठी तिथि (29 अक्टूबर, शनिवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 5 बजकर 51 मिनट से
30 अक्टूबर, रविवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 3 बजकर 29 मिनट तक)
.तृतीय संयम-
सूर्यदेव को प्रथम अर्घ – 30 अक्टूबर, रविवार को सायंकाल अस्ताचल (अस्त होते हुए)
कार्तिक शुक्ल, सप्तमी तिथि (30 अक्टूबर, रविवार को अर्धरात्रि के पश्चात 3 बजकर 29 मिनट से 31 अक्टूबर, सोमवार को अर्धरात्रि के पश्चात 1 बजकर 12 मिनट तक)
चतुर्थ एवं अन्तिम संयम –
31 अक्टूबर, सोमवार को प्रात:काल उगते हुए सूर्यदेव को द्वितीय अर्घ देकर छठ व्रत का पारण किया जाएगा।
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