हनुमान जन्मोत्सव : एक देव, दो उत्सव: आखिर क्या है रहस्य ?
यह बहुत ही रोचक और आध्यात्मिक जिज्ञासा है। हिंदू धर्म में हनुमान जी इकलौते ऐसे देवता हैं जिनकी जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। एक ‘जन्म’ का उत्सव है, तो दूसरा ‘विजय’ का प्रतीक। हनुमान जयंती के अवसर पर अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर संकटमोचन का जन्मोत्सव साल में दो बार क्यों मनाया जाता है? क्या यह केवल परंपरा है या इसके पीछे कोई गहरा पौराणिक और शास्त्रीय आधार है?
“मोक्ष भूमि” तुलसीदास जी की ‘रामचरितमानस’ और महर्षि वाल्मीकि की ‘रामायण’ के संदर्भों के साथ इस रहस्य का विश्लेषण…
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है:
चैत्र शुक्ल पूर्णिमा: इसे आधिकारिक जन्म तिथि माना जाता है।
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी): इसे विजय अभिनन्दन महोत्सव या ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
महर्षि वाल्मीकि रामायण का मत: जन्म का प्रमाण
वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मंगलवार के दिन हुआ था।
पौराणिक कथा: माता अंजनी के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव के अंश के रूप में हनुमान जी ने जन्म लिया। इस दिन को उनके ‘प्राकट्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। सूर्य को फल समझकर निगलने वाली घटना और इंद्र के वज्र से उनकी ठुड्डी (हनु) पर चोट लगने के बाद उनका नाम ‘हनुमान’ पड़ने की कथा इसी कालखंड से जुड़ी है।
2. रामचरितमानस और लोक मान्यता: अमरत्व का वरदान
गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस में हनुमान जी के जन्म की तिथि का सीधा उल्लेख उतना विस्तार से नहीं है जितना उनके कार्यों का है, लेकिन ‘हनुमान चालीसा’ और अन्य भक्ति साहित्यों में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के महत्व का संकेत मिलता है।
सीता जी का वरदान: वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में वर्णन है कि जब हनुमान जी लंका पहुंचे और माता सीता को प्रभु श्री राम का संदेश दिया, तब माता सीता ने उन्हें ‘अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता’ और ‘अजर-अमर’ होने का वरदान दिया था।
कार्तिक चतुर्दशी का संबंध: माना जाता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (दिवाली से एक दिन पहले) को ही माता सीता ने हनुमान जी की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें सिंदूर से विभूषित किया था और अमरत्व का आशीर्वाद दिया था।
तुलसीदास जी लिखते हैं: “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता।।”
यही कारण है कि इस दिन हनुमान जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है और इसे उनके ‘दूसरे जन्म’ या ‘शक्ति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार दोनों तिथियों में अंतर
विशेषता चैत्र शुक्ल पूर्णिमा कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मुख्य कारण जन्म (प्राकट्य) दिवस विजय और अमरत्व प्राप्ति प्रथा इस दिन व्रत और शौर्य की पूजा होती है।इस दिन विशेष दीपदान और सिंदूर लेपन होता है।ग्रह स्थिति चंद्रमा और सूर्य का विशेष योग।दीपावली के उत्सव के साथ शक्ति का आह्वान।
हनुमान जी ‘कलयुग के जाग्रत देवता’ माने जाते हैं। जहाँ चैत्र की पूर्णिमा उनके भौतिक रूप में अवतरण का उत्सव है, वहीं कार्तिक की चतुर्दशी उनके उस स्वरूप की पूजा है जो आज भी धरती पर सदेह मौजूद है।
तुलसीदास जी और वाल्मीकि जी दोनों ही हनुमान जी को ‘राम काज’ के लिए समर्पित बताते हैं। भक्तों के लिए ये दोनों ही दिन समान रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एक दिन वे अपने आराध्य के आने की खुशी मनाते हैं, तो दूसरे दिन उनके अजर-अमर होने के संकल्प को दोहराते हैं।
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