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Ajar Amar Anjani Putra : क्या आज भी हमारे बीच सशरीर मौजूद हैं हनुमान जी?

काशी /आध्यात्मिक डेस्क:

हिंदू धर्म ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में सप्त ऋषियों के साथ-साथ कुछ ऐसी दिव्य आत्माओं का वर्णन है जो अजर-अमर हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम है पवनपुत्र हनुमान का। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम से मिले वरदान के कारण हनुमान जी आज भी इस पृथ्वी पर जीवित हैं और अपने भक्तों के संकट हर रहे हैं।

विश्रामहीन सेवा और अनन्य भक्ति
​शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी की भक्ति और सेवा इतनी तीव्र है कि उन्हें कभी थकान का अनुभव नहीं होता। जहाँ एक ओर साधारण मनुष्य को शारीरिक विश्राम की आवश्यकता होती है, वहीं बजरंगबली 24 घंटे प्रभु राम के संकीर्तन और अपने भक्तों की निगरानी में लीन रहते हैं।

​कहा जाता है कि हनुमान जी की शक्ति और सेवा का वेग इतना प्रबल है कि उनके लिए ‘नींद’ जैसा कोई शब्द अस्तित्व में ही नहीं है। वे कलियुग के जाग्रत देवता माने जाते हैं, जो भक्त की एक पुकार पर दौड़े चले आते हैं।

विभिन्न रूपों में दर्शन: साधु से लेकर रक्षक तक
​अध्यात्म के जानकारों और कई साधकों का अटूट विश्वास है कि हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर विचरण करते हैं। वे अक्सर अपनी पहचान छिपाकर भक्तों की परीक्षा लेने या उनकी सहायता करने आते हैं:

साधु के रूप में: अक्सर कुंभ के मेलों या हिमालय की कंदराओं में एक तेजस्वी साधु के रूप में उनके देखे जाने की कथाएं प्रचलित हैं।
रक्षक बनकर: जब भी कोई भक्त सच्चे मन से संकट में उन्हें याद करता है, वे किसी न किसी रूप में ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं।
रामायण पाठ में उपस्थिति: मान्यता है कि जहाँ भी रामायण का पाठ होता है, वहाँ हनुमान जी किसी न किसी रूप में श्रोता बनकर अवश्य उपस्थित रहते हैं।

कलियुग के रक्षक
​आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मनुष्य मानसिक और शारीरिक कष्टों से घिरा होता है, तब हनुमान चालीसा और उनकी भक्ति एक अभेद्य कवच की तरह काम करती है। वे केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक जीवंत ऊर्जा हैं जो अनुशासन, शक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं।

“अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनुमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन:॥”

अर्थात्: हनुमान जी उन सात चिरंजीवियों में से एक हैं जो समय की सीमाओं से परे हैं।

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Author: Admin Editor MBC

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