अधिक मास 2026: जीवन के सारे कष्ट हर लेगा ’33 बाती का महादीपक’, जानें पुरुषोत्तम मास में दीपदान का अचूक महत्व और विधि
मोक्ष भूमि डेस्क, आध्यात्मिक ब्यूरो
सनातन धर्म में अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास को पुण्य कमाने और आध्यात्मिक उन्नति का सबसे पवित्र महीना माना गया है। इस पूरे महीने में किए गए दान, जप और तप का फल आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक मास में एक विशेष दीपदान आपके जीवन की दिशा और दशा बदल सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं 33 बाती के दीपक की।
आइए जानते हैं कि इस पवित्र महीने में 33 की संख्या का क्या रहस्य है और क्यों इस एक दीपक को जलाने से 33 कोटि देवताओं का आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है।
आखिर 33 बाती का ही महत्व क्यों?
अधिक मास के अधिपति स्वयं भगवान विष्णु (श्री पुरुषोत्तम) हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष मास में भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों के साथ-साथ 33 मुख्य देवताओं का पूजन किया जाता है। इन देवताओं में शामिल हैं:
12 आदित्य (सूर्य के स्वरूप)
8 वसु
11 रुद्र
2 अश्विनी कुमार
जब आप 33 बत्तियों को एक साथ मिलाकर दीपदान करते हैं, तो यह सीधे तौर पर इन सभी 33 देवताओं को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस महादीपक के प्रज्वलित होते ही घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और दरिद्रता का परित्याग होता है।
घर पर कैसे तैयार करें यह महादीपक? (सरल विधि)
इस चमत्कारी दीपक को तैयार करना बेहद सरल है। इसके लिए नीचे दी गई विधि का पालन करें:
दीपक का चयन: इसके लिए आप मिट्टी का एक बड़ा दीया, पीतल का पात्र या फिर घर पर गूंथे हुए आटे का एक बड़ा चौमुखी दीपक बना सकते हैं।
बाती का निर्माण: कलावा (मौली) या शुद्ध सूती लाल/सफेद धागे से 33 अलग-अलग छोटी बत्तियां तैयार करें। अब इन सभी 33 बत्तियों को एक साथ समेटकर एक मोटी एकल बाती का रूप दे दें।
पवित्र ईंधन: दीपक में भरने के लिए शुद्ध गाय का घी सबसे सर्वोत्तम है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो आप तिल के तेल का उपयोग भी कर सकते हैं।
कब और कहाँ करें दीपदान?
वैसे तो अधिक मास के किसी भी दिन यह दीपदान किया जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष तिथियों पर इसका प्रभाव सौ गुना बढ़ जाता है।
सर्वश्रेष्ठ तिथियां: अधिक मास की एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, या पंचमी तिथि पर इस दीपक को जलाना महापुण्यदायी माना गया है।
यहाँ प्रज्वलित करें दीपक:
अपने घर के पूजा मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सम्मुख।
तुलसी जी के क्यारे के पास (विशेष धन लाभ के लिए)।
किसी पवित्र नदी के घाट पर दीपदान के रूप में।
शिव मंदिर में या पीपल के वृक्ष के नीचे।
विशेष
दीपक प्रज्वलित करते समय अपने मन में भगवान पुरुषोत्तम का ध्यान करें। हाथ में थोड़ा जल लेकर अपनी मनोकामना कहें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करते हुए दीपक जलाएं। अधिक मास के समापन से पहले यह दीपदान करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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