Chaitra navratri vrat paran 2026: कब और कैसे करें नवरात्रि व्रत का पारण ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूर्ण विधि
काशी | डॉ संतोष ओझा
सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की शक्ति उपासना के बाद, व्रत का विधिवत समापन यानी ‘पारण’ करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि व्रत का पारण सही समय और नियमों के साथ न किया जाए, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
श्रद्धालुओं के बीच अक्सर यह संशय रहता है कि व्रत का समापन नवमी को करना चाहिए या दशमी को। आइए जानते हैं शास्त्र सम्मत विधि और नियम।
पारण के लिए कौन सी तिथि है श्रेष्ठ?
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि व्रत के पारण को लेकर दो मुख्य मत प्रचलित हैं, लेकिन ‘निर्णय सिंधु’ जैसे ग्रंथों के आधार पर “दशमी तिथि” को पारण करना सबसे उत्तम माना गया है।जो
– भक्त केवल आठ दिनों का व्रत रखते हैं, वे नवमी तिथि को कन्या पूजन के बाद पारण करते हैं।
– जो श्रद्धालु पूरे नौ दिनों का उपवास रखते हैं, उनके लिए दशमी तिथि पर सूर्योदय के बाद पारण करना शास्त्रोक्त है। यदि नवमी तिथि का क्षय हो रहा हो या दशमी तिथि नवमी के दिन ही लग रही हो, तो विद्वानों की सलाह के अनुसार शुभ मुहूर्त में व्रत खोला जा सकता है।
व्रत पारण की संपूर्ण विधि
पारण केवल भोजन करना नहीं, बल्कि एक अनुष्ठानिक समापन है। इसकी सही विधि निम्नलिखित है:
पारण के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
सबसे पहले बोए गए ‘जौ’ (खेती) और स्थापित कलश की पूजा करें। मां दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न करें।
पारण से पूर्व कन्या पूजन अनिवार्य है। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराएं, उन्हें सामर्थ्य अनुसार भेंट दें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
यदि संभव हो तो नवमी के अंत में छोटा हवन करें। पारण से पहले मां को सात्विक भोग (हलवा, पूरी, चना) अर्पित करें।
पारण हमेशा सात्विक भोजन से ही करना चाहिए। इसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग वर्जित है।
पारण के समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम
”बिना नियम और श्रद्धा के किया गया समापन फलदायी नहीं होता।”
नौ दिनों के फलाहार के बाद अचानक भारी भोजन न करें। पहले जल या हल्का प्रसाद ग्रहण करें।
पारण हमेशा सूर्योदय के बाद और शुभ मुहूर्त बीतने से पहले कर लेना चाहिए। रात के समय पारण करना वर्जित माना गया है।
पारण के पश्चात किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को सीधा (कच्चा अनाज) या दक्षिणा देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि का व्रत संयम और शक्ति की उपासना का पर्व है। दशमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव (राम नवमी के अगले दिन) की पूर्णता के साथ व्रत का समापन करने से जीवन में सुख, शांति और मां दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है।
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डिस्क्लेमर : सभी जानकारियाँ सनातन धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों की सलाह और मान्यताओं पर आधारित है। तथ्यों की सटीकता पर संशय के स्थिति पर अपने पुरोहित से सलाह लें ।
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