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धार्मिक मान्यतानुसार होली और रंग पंचमी दोनों ही दिनों का अपना अलग-अलग महत्व और रीति-रिवाज हैं। होली एक सामाजिक त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीकस्वरूप मनाया […]Read more
By dr santosh ojha रंग पंचमी, होली के पांच दिन बाद मनाई जाने वाली एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है। यह त्योहार न केवल रंगों के उत्सव का प्रतीक है, बल्कि […]Read more
होली का त्योहार भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार और भगवान कृष्ण की लीलाओं से भी जुड़ा हुआ है। यह त्योहार भगवान के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम को व्यक्त करते […]Read more
हिंदू धर्म में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अलग-अलग तरह की परम्पराएं चली आ रही हैं, जो वैज्ञानिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती हैं। ऐसी ही एक परम्परा है बच्चे […]Read more
– By Dr santosh ojha होली का इतिहास बहुत पुराना है और इसे लेकर पौराणिक कथाएं भी बहुत दिलचस्प हैं। इस त्योहार की कहानी भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार से […]Read more
होलाष्टक फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से शुरू होता है और पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक जारी रहता है। होली के पहले के 8 दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। […]Read more
23 नवम्बर, शनिवार को भैरव अष्टमी पर्व है। यह दिन भगवान भैरव और उनके सभी रूपों के समर्पित होता है। भगवान भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना […]Read more