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महाभारत युद्ध से पूर्व गुरु द्रोणाचार्य अनेक स्थानो में भ्रमण करते हुए हिमालय (ऋषिकेश) प्हुचे। वहाँ तमसा नदी के तट पर एक दिव्य गुफा में तपेश्वर नामक स्वयंभू शिवलिंग है। […]Read more
रुद्राक्ष महादेव को अति प्रिय माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। रुद्राक्ष को बेहद चमत्कारी माना जाता है। ऐसा […]Read more
फेंगशुई वास्तु शास्त्र में लाफिंग बुद्धा को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि घर में लाफिंग बुद्धा रखने से सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है साथ ही […]Read more
किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल […]Read more
अलग अलग रंग अलग अलग अवर्तियाँ पैदा करते हैं, , मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है, रंग एक रासायनिक मिश्रण है। जिस अंग में जिस प्रकार के रंग की […]Read more
वैसे आपने कड़ी पत्ता, पत्तागोभी, तेजपत्ता, पुदीना, पालक, बेल पत्ता, हरे प्याज के पत्ते आदि का उपयोग तो किया ही होगा। पत्तों का उपयोग खाने, पूजा करने और घाव आदि […]Read more
जन्म स्थान पर मतभेद – मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ) जन्मस्थान का किसी धर्म में वरण नहीं – रावण का जन्म राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा स्थित बिसरख […]Read more
अधूरा ज्ञान बहुत खतरनाक होता है। सबसे पहली बात, वेद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत या किसी अन्य धार्मिक ग्रन्थ में करोड़ शब्द लिखा ही नही है। हमारे धर्म ग्रंथों में […]Read more
भगवान विष्णु को नारायण और हरि के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में आइये जानते हैं भगवान विष्णु के इन नामों के पीछे का रहस्य। भगवान विष्णु को […]Read more
सात वार में नव त्यौहार का अलख जगाने वाला अलबेला नगर काशी जहाँ के आराध्य है बाबा भोले ,ऐसी भोले की नगरी में किये जाने वाला पंचक्रोशी यात्रा के तीसरे […]Read more