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हिन्दू नये साल 2081 और शक संवत 1946 का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा दिनांक 9 अप्रैल 2024 मंगलवार आज से हुआ । इस बार कालयुक्त नाम संवत्सर है जिसके राजा […]Read more
– विमल जैन नवरात्र में कलश स्थापना के साथ श्रीदुर्गा सप्तशती के सम्पुट पाठ करने का विधान है। कार्य विशेष के लिए श्रीदुर्गा सप्तशती के ही मन्त्र का सम्पुट लगाकर […]Read more
चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विधान है। मान्यता है कि जो भक्त इन नौ दिनों में श्रद्धापूर्वक माता का पूजन करता है […]Read more
– डॉ संतोष ओझा, काशी व्रत ईश्वरीय कृपा पाने से लेकर तमाम तरह की मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।मान्यता है कि तन और मन से शुद्ध […]Read more
चैत्र मास के नवरात्रि का आरंभ 22 मार्च, बुधवार से हो गया है। मान्यता है कि नवरात्रि में रोज देवी को अलग-अलग भोग लगाने से तथा बाद में इन चीजों […]Read more
हर साल सभी नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दौरान वास्तु और ज्योतिष के नियमों का पालन करता […]Read more
नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रि) का बोध होता है। इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है। ‘रात्रि’ शब्द सिद्धि का प्रतीक है। भारत के […]Read more
काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा हुआ है। फिर जहां शिव होंगे, वहां देवी गौरी भी होंगी। यहां नवदुर्गा के साथ नौ गौरी के दर्शन का विधान है। नए […]Read more
– ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन – भगवान शिवजी, श्रीविष्णु जी तथा पीपल वृक्ष की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि, खुशहाली – 108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा से अभीष्ट की प्राप्ति […]Read more
– विमल जैन, काशी * मीन राशि के चतुर्ग्रही योग में नवसंवत्सर का प्रारम्भ * चैत्र नवरात्र के प्रतिपदा से नव विक्रम 2081 नवसंवत्सर का होगा शुभारम्भ * इस बार […]Read more