Home 2025 Pitru paksha – ऐसे करे आप आचार्य/ पुरोहित के बिना घर में या जल स्थान पर खुद मंत्र उच्चारण कर तर्पण

" मोक्ष भूमि " आपका अभिनंदन करता हैं। धार्मिक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहिये।   निवेदन : " मोक्षभूमि " डेस्क को 9889940000 पर व्हाट्सअप कर निशुल्क ज्योतिष,वास्तु, तीज - त्यौहार और व्रत या अन्य समस्या का समाधान पूछ सकते हैं।

Pitru paksha – ऐसे करे आप आचार्य/ पुरोहित के बिना घर में या जल स्थान पर खुद मंत्र उच्चारण कर तर्पण

Pitru Paksha 2025 : जानिए क्या हैं श्राद्ध कर्म, पितृ पक्ष की तिथियां , किस समय करें श्राद्धश्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान पितरों की मुक्ति तर्पण और पिंडदान किया जाता है। तर्पण यानी जल देना और पिंडदान यानी भोजन देना। जैसे पशुओं का भोजन तृण और मनुष्यों का भोजन अन्न कहलाता है, वैसे ही देवता और पितरों का भोजन अन्न का सार तत्व है। सार तत्व अर्थात गंध, रस और ऊष्मा ।

पूजन सामग्री –

१. त्रि-कुश
तीन कुशों को एक साथ बाँध लेना। तीन कुशों को बँट कर रस्सी की तरह बनाना।
२. मोटक
तीन कुर्शो को बँटकर रस्सी की तरह बनाना
३. पवित्री
तीन कुर्शो को बँटकर दोहरी करके सिरे पर गाँठ देना और अंगूठी की तरह अनामिकाओं में पहनना।
४. तिल
५. यव (जौ )
६. अक्षत
७. पुष्प
८. चन्दन
९. तुलसी दल।
१०. नया यज्ञोपवीत
१९. स्वच्छ धोती अंगौछा।

देव, ऋषि, दिव्य पितृ, यम एवं स्व-पितृ का तर्पण

1 शिखा बन्धन

गायत्री मन्त्र जप करता हुआ शिखा बाँधे।

२. तिलक

मस्तक पर चन्दनादि का तिलक लगावे।

३. प्राणायाम

प्रणव (ॐ) से पूरक, कुम्भक, रेचक तीन बार

४. आचमन

दाहने हाथ में जल लेकर, निम्न मन्त्र पढ़कर तीन बार आचमन करे

१ ॐ केशवाय नमः । २ ॐ माधवाय नमः । ३ ॐ नारायणाय नमः ।

५. सङ्कल्प

दाहने हाथ में कुश, यव और अक्षत तथा जल लेकर
‘सङ्कल्प’ करे। यथा

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः तत्सत् । अद्यैतस्य
ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय प्रहरार्द्धे श्रीश्वेत-वाराहकल्पे
जम्बुद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तेक देशान्तर्गते पुण्य क्षेत्रे कलि युगे कलि-प्रथम-चरणे अमुक-नाम संवत्सरे ‘आश्विन’ मासे ‘कृष्ण’-पक्षे अमुक-तिथी अमुक-वासरे अमुक-गोत्रोत्पन्नो अमुक शर्मा ह ( वर्माहं, गुप्तोऽहं, दासोऽहं वा) देवर्षि पितृ तर्पणं करिष्ये।

उक्त पढ़कर जल सहित अक्षतादि पात्र/ नदी में छोड़ दे।

६. विश्वे देवों का आवाहन

पहले सामने के पात्र में चन्दन, जौ, अक्षत, पुष्प और तुलसी-दल छोड़े। फिर उसमें तीन कुशों को रखे। अब उस पात्र में जल छोड़ता हुआ मन्त्र पढ़कर विश्वेदेवों का आवाहन करे। यथा

ॐ विश्वेदेवान् आवाहयिष्ये। ॐ आवाहय ॐ विश्वेदेवास आगत शृणुता म इम-ग्वम् हवम् इदं बहिर्निषीदत। ॐ ब्रह्मादयो विश्वेदेवा अत्रागच्छत। ॐ विश्वेदेवाः शृणुते म-ग्वम् हवं मे ये अन्तरिक्षे य उपद्यविष्ठ। ये अग्नि-जिह्वा उत वा यजत्रा आसद्यास्मिन् बर्हिषि मादयध्वम्

७. देव-तर्पण ( पूर्व दिशा मुख )

ॐ ब्रह्मा तृप्यताम् । ॐ विष्णुः तृप्यताम् । ॐ रुद्रः तृप्यताम् । ॐ प्रजापतिः तृप्यताम् । ॐ देवाः तृप्यन्ताम् । ॐ छन्दांसि तृप्यन्ताम् । ॐ वेदाः तृप्यन्ताम् । ॐ ऋषयः तृप्यन्ताम् । ॐ पुराणाचार्याः तृप्यन्ताम् । ॐ गन्धर्वाः तृप्यन्ताम् । ॐ इतराचार्याः तृप्यन्ताम् । ॐ संवत्सरः सावयवः तृप्यन्ताम् । ॐ देव्यः तृप्यन्ताम् । ॐ अप्सरसः तृप्यन्ताम् । ॐ देवानुगाः तृप्यन्ताम् । ॐ नागाः तृप्यन्ताम् । ॐ सागरा: तृप्यन्ताम् । ॐ पर्वताः तृप्यन्ताम् । ॐ सरितः तृप्यन्ताम् । ॐ मनुष्याः तृप्यन्ताम् । ॐ यक्ष तृप्यन्ताम् । ॐ रक्षांसि तृप्यन्ताम् । ॐ पिशाचा: तृप्यन्ताम् । ॐ सुपर्णाः तृप्यन्ताम् । ॐ भूतानि तृप्यन्ताम् । ॐ पशवः तृप्यन्ताम् । ॐ वनस्पतयः तृप्यन्ताम् । ॐ ओषधयः तृप्यन्ताम् । ॐ भूत ग्रामश्चतुर्विधाः तृप्यन्ताम् ।

८. ऋषियों का आवाहन ( उत्तर दिशा मुख )

पहले यज्ञोपवीत (जनेऊ) और उत्तरीय (गमछे) को गले में कण्ठी के समान पहन ले उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे। हाथ में कुश’ और ‘ यव’ (जौ) लेकर दो-दो अँजुली जल देकर पूर्व-वत् आवाहन-पूर्वक तर्पण करे। यथा

ॐ सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीरे सप्त रक्षन्ति सदमप्रमादम्। सप्तापः स्वपतो लोकमीयुः तत्र जाग्रतो अ-स्वप्नजौ सत्र-सदौ च देवौ। ॐ सनकाद्याः सप्त ऋषयः अत्रागच्छत ।

९. ऋषि तर्पण

ॐ सनकः तृप्यताम् । ॐ सनन्दनः तृप्यताम् । ॐ सनातनः तृप्यताम् । ॐ कपिलः तृप्यताम् । ॐ आसुरिः तृप्यताम् । ॐ वोढुः तृप्यताम् । ॐ पञ्च शिख: तृप्यताम् ।

१०. दिव्य पितृ आवाहन ( दक्षिण दिशा मुख काला तिल )

पहले अपसव्य’ हो जाए अर्थात् यज्ञोपवीत और गमछा दाहिने कन्धे पर कर ले। फिर हाथ में मोटक, तिल’ और ‘जल’ लेकर तीन-तीन अञ्जलि जल देकर पूर्ववत् आवाहन-पूर्वक तर्पण करे। यथा

ॐ आयान्तु नः पितरः सोम्यासोऽग्निष्वात्ताः पथिभिर्देव-यानैः । अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो अघि ब्रुवन्तु तेऽवन्त्वस्मान् । ॐ कव्य वाडनलादयो दिव्य पितरः अत्रागच्छत।

११. दिव्य पितृ तर्पण

ॐ कव्य वाडनलः तृप्यतां इदं तिलोदकं स्वधा नमः। ॐ सोमः तृप्यतां इदं तिलोदकं स्वधा नमः। ॐ यमः तृप्यतां इदं तिलोदकं स्वधा नमः । ॐ अर्यमा तृप्यतां इदं तिलोदकं स्वधा नमः। ॐ अग्निष्वात्ताः तृप्यन्तां इदं तिलोदकं जलं तेभ्यः स्वधा नमः। ॐ सोमपाः तृप्यन्तां इदं जलं तेभ्यः स्वधा नमः। ॐ बर्हिषदः पितरः तृप्यन्तां इदं जलं तेभ्यः स्वधा नमः ।

१२. चौदह यम-आवाहन

पहले बाँएँ घुटने को जाँघ के नीचे दबाकर ‘ दक्षिण मुख’ होकर बैठे। फिर ‘अपसव्य’ रहते हुए तीन अज्जलि जल ‘कुश’ और ‘तिल’ के साथ चौदह यमों को दे। पहले आवाहन करे।

यथा ॐ यमादि चतुर्दश-देवा आगच्छन्तु गृह्णन्तु एतान् जलाञ्जलीन् ।

१३. यमादि का तर्पण

ॐ यमाय नमः । ॐ धर्मराजाय नमः । ॐ मृत्यवे नमः । ॐ अन्तकाय नमः । ॐ वैवस्वताय नमः । ॐ कालाय नमः । ॐ सर्व-भूत-क्षयाय नमः । ॐ औदुम्बराय नमः । ॐ दध्नाय नमः । ॐ नीलाय नमः । ॐ परमेष्ठिने नमः । ॐ वृकोदराय नमः । ॐ चित्राय नमः । ॐ चित्रगुप्ताय नमः ।

१४. अपने पितरों का आह्वान करें-
( दक्षिण मुख, जनेऊ को दाहिने कंधे पर )
( पितृ तीर्थ से अर्थात् अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से तर्पण )

ॐ आगच्छन्तु में पितर इमम ग्रहन्तु जलान्जलिम |
तर्पण करते वक्त अपने गोत्र का नाम लेकर बोलें,

गोत्रे अस्मत्पितामह (पिता का नाम) वसुरूपत् तृप्यतमिदं
तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा
नमः, तस्मै स्वधा नमः ।

अपने पितरों का आवाहन ‘मोटक, कुश’ और ‘तिल’ से ऊपर की ही तरह जल प्रदान करे। पहले आवाहन करे। यथा ॐ पितॄन् आवाहयिष्ये, आवाहय

१५. अपने पितरों का तर्पण

१. पिता-ॐ गोत्र: अस्मत् पिता वसु-स्वरूपः
तृप्यतां इदं जलं तस्मै स्वधा नमः ।

२. दादा- ॐ गोत्रः अस्मत् पितामह रुद्र-स्वरूपः
तृप्यतां इदं जलं तस्मै स्वधा नमः ।

३. परदादा-ॐ गोत्र: अस्मत् प्रपितामह आदित्य स्वरूपः तृप्यतां इदं जलं तस्मै स्वधा नमः।

४. माता-ॐ गोत्रा अस्मत् माता गायत्री रूपा तृप्यतां इदं जलं तस्यै स्वधा नमः ।

५. दादी-ॐ गोत्रा अस्मत् पितामही सावित्री रूपा तृप्यतां इदं जलं तस्यै स्वधा नमः ।

६. परदादी-ॐ गोत्रा अस्मत् प्रपितामही सरस्वती-रूपा तृप्यतां इदं जलं तस्यै स्वधा नमः।

७. नाना-ॐ गोत्रः अस्मत् मातामहो वसु-स्वरूप: सपत्नीकः तृप्यतां इदं जलं तस्मै स्वधा नमः।

८. परनाना-ॐ गोत्रो अस्मत् प्रमातामहो रुद्र स्वरूपः सपत्नीकः तृप्यतां इदं जलं तस्मै स्वधा नमः ।

९. वृद्ध परनाना- ॐगोत्रो अस्मत् वृद्ध प्रमातामहो आदित्य-स्वरूपः सपत्नीकः तृप्यतां इदं जलं तस्मै स्वधा नमः ।

१६. (क) अन्य सम्बन्धियों का तर्पण

एक-एक अञ्जलि निम्न मन्त्र से प्रदान करे

ॐ आब्रह्म-स्तम्ब- पर्यन्तं, देवर्षि पितृ-मानवाः ।
तृप्यन्तु पितरः सर्वे, मातृ माता महादयः ।।
ॐ अतीत-कुल-कोटीनां, सप्त-द्वीप-निवासिनाम्।
मया दत्तेन तोयेन, तृप्यन्तु भुवन त्रयम् ॥
ॐ ये बान्धवा अबान्धवा वा, येऽन्य-जन्मनि बान्धवाः ।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु, मद् दत्तेनाम्बुना सदा ।।

– अपुत्र अपुत्रियों का तर्पण अंगौछे की चार तह कर भिगोवे और उसे निचोड़कर निम्न मन्त्र से जल दे

ॐ ये चास्माकं कुले जाता, अपुत्रा गोत्रिणो मृताः।
ते तृप्यन्तु मया दत्तं, वस्त्र निष्पीडनोदकम् ।।

– भीष्म पितामह का तर्पण ( पूर्व दिशा, सव्य, अंजूरी से )

सव्य होकर अर्थात् यज्ञोपवीत और अंगौछे को बाँएँ कन्धे पर करे तब जल दे

ॐ वैयाघ्र-पद-गोत्राय, सांकृति प्रवराय च।
अपुत्राय ददाम्येतद्, सलिलं भीष्म वर्मणे ।।

१७. भगवान् सूर्य को अर्घ्य अब दाहिने हाथ में जल, चन्दन, पुष्प लेकर सूर्य भगवान् को अर्घ्य दे

ॐ एहि सूर्य! सहस्त्रांशो, तेजो-राशे जगत् पते!
अनुकम्पय मां भक्त्या, गृहाणार्घ्यं दिवाकर! ।।

१८. दिक्-पालों को नमस्कार जल दे चुकने पर हाथ जोड़कर दिक्-पालों कोनमस्कार करे। यथा

ॐ इन्द्राय नमः पूर्व दिशा
ॐ यमाय नमः- दक्षिण दिशा
ॐ वरुणाय नमः- पश्चिम दिशा
ॐ सोमाय नमः उत्तर दिशा

पितृ तर्पण-विधि

ॐ ह्मणे नमः ऊपर दिशा
ॐ अग्नये नमः-आग्नेय दिशा
ॐ नितये नमः -नैऋत्य दिशा
ॐ वायवे नमः वायव्य दिशा
ॐ ईशानाय नमः-ईशान दिशा
ॐ अनन्ताय नमः-अधः दिशा

जल के मध्य में

ॐ ब्रह्मणे नमः, ॐ अग्नये नमः, ॐ पृथिव्यै नमः, ॐ ओषधिभ्यो नमः, ॐ वाचे नमः, ॐ वाचस्पतये नमः, ॐ महद्भ्यो नमः, ॐ विष्णवे नमः, ॐ वरुणाय नमः ।

१९. विसर्जन

पुष्पाक्षत सहित हाथ जोड़कर, निम्न मन्त्र पढ़कर सब देवताओं को विदा करे
ॐ देवा! गातु-विदो गातुं वित्त्वा मातुमित ।
मनसस्पत इमं देव! यज्ञ ॐ स्वाहा वाते धाः ।।

२०. समर्पण

पुष्पाक्षत सहित हाथ जोड़कर, अपने सम्पूर्ण पूजा कर्म को अर्पित करे
अनेन यथा-शक्ति-कृतेन देव-ऋषि-पितृ
तर्पणाख्येन कर्मणा भगवान् मम समस्त-पितृ स्वरूपी जनार्दन वासुदेवः प्रीयतां न मम। ॐ तत्सत् ब्रह्मार्पणमस्तु ।।

इन्हें भी जानिए

Pitru Paksha – पितृ पक्ष में क्या करें क्या न करें..? क्या है श्राद्ध के 12 प्रकार और

Pitru Paksha 2025 : जानिए क्या हैं श्राद्ध कर्म, पितृ पक्ष की तिथियां , किस समय करें श्राद्ध

Pitru paksh : पितृ पक्ष में सपने में दिखें ये 7 चीजें तो मानिये आप पर है पितरों की विशेष कृपा

Pitru paksh : पुत्री संग विशेष परिस्थिति में महिलाएं भी कर सकती हैं श्राद्ध

Pitru paksh : पितरों की नाराजगी दूर करेगा काला तिल, इन उपायों से आएगी खुशहाली



विश्वनाथ मंदिर  1 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km


 आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो आप इसे फेसबुक, व्हाट्सप्प पर शेयर और लाइक करें। ताकि काशी की पहली धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि” की यह जानकारी दूसरे सनातनी को मिल सके




विशिष्ट जानकारियां

Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र

Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता

Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध

Parshuram : विष्णु अवतार होने के बाद भी क्यों नहीं होती परशुराम जी की पूजा ? जानें इनके जीवन से जुड़ी 5 अनसुनी बातें

Akshy Tritiya : त्रेतायुग के प्रारंभ का दिन अक्षय तृतीया क्यों है ख़ास, जानिए किन चीजों का करना चाहिए दान और क्यों..

हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना

Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?

Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?

Hanuman rahasy : क्या है हनुमान क़े जीवित होने की कथा संग जानिए उनके बंदर, जन्म, निवास, सिंदूर और पत्नी का नाम से जुड़ी 9 रहस्य

Powerful Hanuman Mantra : समस्या या संकट से हों परेशान, तो करें इस मंत्र का जाप, परेशानियों पर सीधा चलेगा बजरंग बाण

Duj ka chand : दूज का चांद क्यों होता है खास, क्यों करते हैं द्वितीया के चंद्र का दर्शन, मुसलमानों का संबंध

Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ

यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..

आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह

Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव

Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?

आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र

जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?

Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं ‘खिचड़ी’ ? क्या है इसके पीछे का कारण ? जानिए किन किन ग्रहों का होता है कनेक्शन

Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा

शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन

जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व

अयोध्या के 5 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के बाद काशी के पंचकोशी क्षेत्र को मांस मदिरा से मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग तेज, cm को लिखा पत्र

Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?

जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?

भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में

Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..

वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें

हनुमान जन्मोत्सव : भगवान शिव के 11वाँ रूद्र अवतार प्रभू हनुमान का दो बार क्यों मनाया जाया है जन्मोत्सव, जानिए इससे जुड़ी कथा

Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता




चाणक्य की बातें

चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …

Chanakya ki bat : जीवन में होने लगे ऐसी घटनाएं तो समझ लें मां लक्ष्मी हैं क्रोधित, आर्थिक संकट है नजदीक

थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए

कथाएं रामायण की ..

Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण


कथाएं महाभारत की ..

Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?

महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को

Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?

क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें

जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला

जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…

कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र

महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध

जानिए पांडवो के स्वर्ग जाने की कथा, किन वजहों से पांचो पांडव बारी बारी नीचे गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए

निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..


Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.


 


Author: Admin Editor MBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!