Home 2025 Jitiya Vrat Kab Hai 2025 – नोट कर लें जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख, पूजा विधि एवं मुहूर्त, किसकी होती है पूजा

" मोक्ष भूमि " आपका अभिनंदन करता हैं। धार्मिक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहिये।   निवेदन : " मोक्षभूमि " डेस्क को 9889940000 पर व्हाट्सअप कर निशुल्क ज्योतिष,वास्तु, तीज - त्यौहार और व्रत या अन्य समस्या का समाधान पूछ सकते हैं।

Jitiya Vrat Kab Hai 2025 – नोट कर लें जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख, पूजा विधि एवं मुहूर्त, किसकी होती है पूजा और महत्व

– डॉ संतोष ओझा, काशी

– आश्विन कृष्ण अष्टमी पर किया जाता है जितिया व्रत।
– निर्जला रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत।
– संतान को मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वाद।

बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर जितिया व्रत किया जाता है जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। माना गया है कि इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करने से संतान को दीर्घायु स्वास्थ्य और सुख-सम्पन्नता की होती है।

किस देवता की होती है पूजा ?

जितिया व्रत के दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, जीमूतवाहन एक गंधर्व राजकुमार थे। माना जाता है कि राजा जीमूतवाहन ने एक नागिन के पुत्र को बचाने के लिए खुद को गरुड़ के हवाले कर दिया था। इसी कारण उन्हें भगवान के रूप में पूजा जाने लगा और माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत करने लगीं।

2025 में जितिया व्रत कब..

जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतानों की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री ये व्रत श्रद्धापूर्वक करती है उसकी संतान दीर्घायु, निरोगी, तेजस्वी और सुख-सम्पन्न होती है। यह उपवास मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश की महिलाओं द्वारा किया जाता है। नेपाल में भी ये व्रत बेहद लोकप्रिय है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय ज्योतिष के प्रोफेसर डॉ सुभाष पाण्डेय और प्रो. विनय पाण्डेय ने बताया इस वर्ष जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार को रखा जाएगा। जीवित्पुत्रिका व्रत अष्टमी तिथि को मनाया जाता है जो 14 सितंबर की सुबह 05:04 से लेकर 15 सितंबर की सुबह 03:06 बजे तक रहेगी।

जितिया पूजा मुहूर्त 2025

ब्रह्म मुहूर्त 04:33 से 05:19 am
सन्ध्या 04:56 से 06:05 am
अभिजित मुहूर्त 11:52 से 12:41 pm
विजय मुहूर्त 02:20 से 03:09 pm
गोधूलि मुहूर्त 06:27 से 06:51pm
सायाह्न सन्ध्या 06:27 से 07:37 pm

ऐसे करें व्रत पूजन

इस दिन माताएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद जीमूतवाहन के समक्ष दीपक जलाकर पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।

इसके बाद घर के मंदिर में धूप, दीप, आरती करें और इसके बाद भोग लगाएं।

फिर मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्ति तैयार करें।

फिर कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप, दीप, चावल, पुष्प आदि चढ़ाएं।

फिर विधि विधान पूजा करें और जितिया व्रत की कथा सुनें।

पूरे दिन व्रत करने के बाद अगले दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत का पारण कें। इस दौरान चावल, मरुवा की रोटी, तोरई, रागी और नोनी का साग खाया जाता है।

जितिया व्रत का महत्व

यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र और उसकी मंगल कामना के लिए रखा जाता है। यह भी मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान के सभी दुख और तकलीफ दूर होते हैं। इस व्रत को लेकर यह मान्यता भी प्रचलित है कि, जो भी महिला जितिया व्रत कथा सुनती है, उसे जीवन में कभी भी संतान वियोग का सामना नहीं करना पड़ता।

जीवित्पुत्रिका व्रत की पौराणिक कथा

जीवित्पुत्रिका या जिउतिया व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद अश्वथामा अपने पिता की मृत्यु की वजह से क्रोध में था। वह अपने पिता की मृत्यु का पांडवों से बदला लेना चाहता था। एक दिन उसने पांडवों के शिविर में घुस कर सोते हुए पांडवों के बच्चों को मार डाला। उसे लगा था कि ये पांडव हैं। लेकिन वो सब द्रौपदी के पांच बेटे थे। इस अपराध की वजह से अर्जुन ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसकी मणि छीन ली।

इससे आहत अश्वथामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रही संतान को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया। लेकिन उत्तरा की संतान का जन्म लेना जरूरी था। जिस वजह से श्रीकृष्ण ने अपने सभी पुण्य का फल उत्तरा की गर्भ में मरी संतान को दे दिया और वह जीवित हो गया। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से गर्भ में मरकर जीवित होने के वजह से इस बच्चे को जीवित्पुत्रिका नाम दिया गया। यही आगे चलकर राज परीक्षित बने। तभी से संतान की लंबी उम्र के लिए हर साल जिउतिया व्रत रखने की परंपरा को निभाया जाता है।

एक और कथा

उस कथा के अनुसार गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन ने नाग वंश की रक्षा के लिए स्वयं को पक्षीराज गरुड़ का भोजन बनने के लिए सहर्ष तैयार हो गए थे। उन्होंने अपने साहस और परोपकार से शंखचूड़ नामक नाग का जीवन बचाया था। उनके इस कार्य से पक्षीराज गरुड़ बहुत प्रसन्न हुए थे और नागों को अपना भोजन न बनाने का वचन दिया था। पक्षीराज गरुड़ ने जीमूतवाहन को भी जीवनदान दिया था। इस तरह से जीमूतवाहन ने नाग वंश की रक्षा की थी। इस घटना के बाद से ही हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाने लगा।



विश्वनाथ मंदिर  1 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km


 आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो आप इसे फेसबुक, व्हाट्सप्प पर शेयर और लाइक करें। ताकि काशी की पहली धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि” की यह जानकारी दूसरे सनातनी को मिल सके




विशिष्ट जानकारियां

Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र

Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता

Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध

Parshuram : विष्णु अवतार होने के बाद भी क्यों नहीं होती परशुराम जी की पूजा ? जानें इनके जीवन से जुड़ी 5 अनसुनी बातें

Akshy Tritiya : त्रेतायुग के प्रारंभ का दिन अक्षय तृतीया क्यों है ख़ास, जानिए किन चीजों का करना चाहिए दान और क्यों..

हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना

Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?

Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?

Hanuman rahasy : क्या है हनुमान क़े जीवित होने की कथा संग जानिए उनके बंदर, जन्म, निवास, सिंदूर और पत्नी का नाम से जुड़ी 9 रहस्य

Powerful Hanuman Mantra : समस्या या संकट से हों परेशान, तो करें इस मंत्र का जाप, परेशानियों पर सीधा चलेगा बजरंग बाण

Duj ka chand : दूज का चांद क्यों होता है खास, क्यों करते हैं द्वितीया के चंद्र का दर्शन, मुसलमानों का संबंध

Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ

यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..

आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह

Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव

Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?

आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र

जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?

Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं ‘खिचड़ी’ ? क्या है इसके पीछे का कारण ? जानिए किन किन ग्रहों का होता है कनेक्शन

Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा

शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन

जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व

अयोध्या के 5 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के बाद काशी के पंचकोशी क्षेत्र को मांस मदिरा से मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग तेज, cm को लिखा पत्र

Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?

जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?

भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में

Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..

वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें

हनुमान जन्मोत्सव : भगवान शिव के 11वाँ रूद्र अवतार प्रभू हनुमान का दो बार क्यों मनाया जाया है जन्मोत्सव, जानिए इससे जुड़ी कथा

Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता




चाणक्य की बातें

चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …

Chanakya ki bat : जीवन में होने लगे ऐसी घटनाएं तो समझ लें मां लक्ष्मी हैं क्रोधित, आर्थिक संकट है नजदीक

थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए

कथाएं रामायण की ..

Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण


कथाएं महाभारत की ..

Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?

महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को

Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?

क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें

जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला

जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…

कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र

महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध

जानिए पांडवो के स्वर्ग जाने की कथा, किन वजहों से पांचो पांडव बारी बारी नीचे गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए

निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..


Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.


 


Author: Admin Editor MBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!