Pitru Paksha 2025 : जानिए क्या हैं श्राद्ध कर्म, पितृ पक्ष की तिथियां , किस समय करें श्राद्ध
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व होता है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक यह पक्ष चलता है। यह 16 दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और हमें उनका आशीष देते है। मान्यता है कि जो लोग अपने पितरों का श्राद्ध, श्रद्धा और विधिपूर्वक करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पहले जानिए क्या हैं श्राद्ध कर्म ?
इस संसार से जा चुके पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष में जो विधिपूर्वक श्रद्धाके साथ तर्पण , दान आदि किया जाता है उसे श्राद्ध कर्म कहा जाता है। जिसका उद्देश्य अपने पितृगणों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण भाव प्रकट करना है। “श्राद्ध” शब्द स्वयं श्रद्धा से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है, सच्चे मन से, विश्वासपूर्वक और प्रेमपूर्वक किया गया कर्म। शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य केवल इस देह से ही नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के संचित पुण्यों और संस्कारों से भी पलवित होता है। आज जिस देह, ज्ञान, संस्कार और जीवन का हमें वरदान मिला है, वह पितृऋण से बँधा है। श्राद्ध कर्म के माध्यम से जातक अपने इस पितृऋण का निर्वहन करता हैं।
कब से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष?
पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल श्राद्ध पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है और 21 सितंबर को श्राद्ध पक्ष समाप्त होगा।
पितृ पक्ष की तिथियां
पूर्णिमा श्राद्ध- 07 सितम्बर 2025, रविवार
प्रतिपदा श्राद्ध- 08 सितम्बर 2025, सोमवार
द्वितीया श्राद्ध- 09 सितम्बर 2025, मंगलवार
तृतीया श्राद्ध- 10 सितम्बर 2025, बुधवार
चतुर्थी श्राद्ध- 10 सितम्बर 2025, बुधवार
पञ्चमी श्राद्ध- 11 सितम्बर 2025, बृहस्पतिवार
महा भरणी- 11 सितम्बर 2025, बृहस्पतिवार
षष्ठी श्राद्ध- 12 सितम्बर 2025, शुक्रवार
सप्तमी श्राद्ध- 13 सितम्बर 2025, शनिवार
अष्टमी श्राद्ध- 14 सितम्बर 2025, रविवार
नवमी श्राद्ध- 15 सितम्बर 2025, सोमवार
दशमी श्राद्ध- 16 सितम्बर 2025, मंगलवार
एकादशी श्राद्ध- 17 सितम्बर 2025, बुधवार
द्वादशी श्राद्ध- 18 सितम्बर 2025, बृहस्पतिवार
त्रयोदशी श्राद्ध- 19 सितम्बर 2025, शुक्रवार
चतुर्दशी श्राद्ध- 20 सितम्बर 2025, शनिवार
सर्वपितृ अमावस्या- 21 सितम्बर 2025, रविवार
श्राद्ध की तिथि आधार ?
श्राद्ध कर्म मृत्यु के हिंदी तिथि के आधार पर किया जाता है। यानी जिस दिन व्यक्ति की मृत्यु हुई थी, पितृ पक्ष के उसी दिन उसका श्राद्ध किया जाता है। जबकि तर्पण प्रतिदिन किया जाता हैं। अगर किसी को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि याद नहीं है, तो वह अमावस्या के दिन सर्वपितृ श्राद्ध कर सकते हैं। यह तिथि उन सभी पितरों के लिए होती है जिनकी मृत्यु तिथि मालूम न हो।
श्राद्ध करने की सही विधि
श्राद्ध कर्म करने के लिए किसी योग्य ब्राह्मण को बुलाना चाहिए। ब्राह्मणों की मदद से तर्पण और पिंडदान कराया जाता है। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना चाहिए। यही नहीं, यदि आप किसी गरीब, जरूरतमंद की मदद करें तो उसका भी पुण्य है। श्राद्ध में गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भोजन निकालना बहुत जरूरी माना जाता है। इन्हें भोजन देने के बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए उनसे श्राद्ध ग्रहण करने की प्रार्थना करें।
किस समय करें श्राद्ध कर्म ?
शास्त्रों में श्राद्ध कर्म का सबसे अच्छा समय दोपहर बताया गया है। क्योंकि यह समय पितरो का होता हैं।
विश्वनाथ मंदिर 1 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km
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