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Rahsyamayi Patal Lok : धरती के नीचे बसी है ‘स्वर्णमयी दुनिया’, उन 7 लोकों का सच, जहाँ नहीं पहुँचती सूर्य की किरणें

​काशी / स्पेशल डेस्क

हिंदू धर्मग्रंथों और विशेषकर विष्णु पुराण में ब्रह्मांड की संरचना का अद्भुत वर्णन मिलता है। जहाँ ऊपर सात आकाश (स्वर्ग आदि) हैं, वहीं धरती के नीचे सात गहरे लोक बसे हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘पाताल’ कहा जाता है। यह कोई काल्पनिक लोक नहीं, बल्कि दिव्य शक्तियों, नागों और असुरों के वैभवशाली साम्राज्य हैं।

​आइए जानते हैं पाताल के इन 7 स्तरों का रहस्य और वहां के निवासी:

​1. अतल लोक: माया का केंद्र

​यह पाताल का पहला स्तर है। यहाँ प्रसिद्ध असुर बाला (मय दानव के पुत्र) का शासन है। कहा जाता है कि बाला ने 96 प्रकार की मायावी शक्तियों की रचना की है। यहाँ विलासिता और माया का प्रभाव सबसे अधिक है।

​2. वितल लोक: महादेव का निवास

​दूसरे स्तर पर भगवान शिव अपने हटकेश्वर रूप में वास करते हैं। उनके साथ उनके गण और भूत-प्रेत रहते हैं। यहाँ की विशेषता हटकी नदी है, जिसके जल से बनने वाला सोना पाताल के वैभव को बढ़ाता है।

3. सुतल लोक: राजा बलि का स्वर्ग

​पाताल का सबसे सुंदर और सुरक्षित हिस्सा। यहाँ दानवीर राजा बलि का शासन है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर बलि से तीन पग भूमि मांगी थी और उन्हें सुतल लोक का स्वामी बनाया था। मान्यता है कि राजा बलि आज भी यहीं से प्रतिवर्ष ओणम पर अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आते हैं।

4. तलातल लोक: वास्तुकला का चमत्कार

​यहाँ दानवराज मय का निवास है। मय दानव को देवताओं का वास्तुकार माना जाता है, जिन्होंने इंद्रप्रस्थ जैसे मायावी महलों का निर्माण किया था। यहाँ की सुरक्षा और तकनीक अद्भुत मानी जाती है।

​5. महातल लोक: अनेक फन वाले नाग

​यह नागों का घर है। कद्रु से उत्पन्न हुए तक्षक, कालिया और सुषेण जैसे विशालकाय और कई सिरों वाले नाग यहाँ स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं।

6. रसातल लोक: असुरों की शक्ति

​यहाँ उन दैत्यों और दानवों का निवास है जो देवताओं के घोर शत्रु रहे हैं। पणि, निवातकवच और कालकेय जैसे शक्तिशाली असुर यहाँ वास करते हैं।

7. पाताल लोक: नागों का सर्वोच्च सिंहासन

​यह पाताल का अंतिम और सबसे निचला स्तर है। यहाँ के राजा वासुकी नाग हैं। यह भूमि पूरी तरह स्वर्णमयी है और यहाँ सूर्य की रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि नागों के फन पर लगी दिव्य मणियाँ इसे सदैव प्रकाशित रखती हैं। स्वयं शेषनाग इसी लोक के आधार स्तंभ माने जाते हैं।

पुराणों के अनुसार, पाताल लोक केवल अंधेरे का स्थान नहीं है, बल्कि यह धन, वैभव और दिव्य शक्तियों से परिपूर्ण एक समांतर दुनिया है। यहाँ का अनुशासन और शक्ति संतुलन आज भी धार्मिक जिज्ञासुओं के लिए शोध का विषय है।

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Author: Admin Editor MBC

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