विशेष रिपोर्ट: क्या आज भी सुरक्षित है रावण का शव? श्रीलंका के जंगलों में मिली ‘ममी’ ने बढ़ा दी जिज्ञासा
15 मार्च, 2026
पौराणिक इतिहास और आधुनिक पुरातत्व के बीच एक बार फिर रावण के अंत को लेकर बहस छिड़ गई है। सामान्यतः माना जाता है कि युद्ध के पश्चात रावण का अंतिम संस्कार विभीषण द्वारा किया गया था, परंतु अब ‘नाग कुल’ की परंपराओं और श्रीलंका के पुरातत्व विभाग के दावों ने एक नई कहानी सामने रखी है।
अग्निदाह नहीं, बल्कि ममी के रूप में संरक्षण?
वाल्मीकि रामायण के संदर्भों के अनुसार, रावण पुलस्त्य मुनि का पौत्र और ऋषि विश्रवा का पुत्र था। उसकी माता कैकसी ‘नाग कुल’ से संबंधित थीं। जानकारों का तर्क है कि नाग कुल की प्राचीन परंपराओं में शव का अग्निदाह नहीं किया जाता था।
ऐसी मान्यता है कि युद्ध के बाद रावण के अनुयायियों और नाग कुल के लोगों को यह विश्वास था कि रावण पूर्णतः मृत नहीं हुआ है, क्योंकि उसके पास अमृत का प्रभाव था। इसी आशा में कि उसे पुनर्जीवित किया जा सकता है, रावण के शव को विभिन्न रसायनों (Chemicals) का लेप लगाकर एक ‘ममी’ के रूप में सुरक्षित रख दिया गया।
रेगला के जंगलों में मिला 18 फीट का ताबूत
श्रीलंका के पुरातत्व विभाग के हालिया दावों ने इस थ्योरी को और बल दिया है। मध्य श्रीलंका के रेगला स्थित घने जंगलों में एक ऊंचे पर्वत पर एक रहस्यमयी गुफा मिली है, जिसे ‘रावण गुफा’ कहा जा रहा है। यहाँ एक विशाल ताबूत मिला है जिसकी लंबाई 18 फीट और चौड़ाई 5 फीट बताई जा रही है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, आज भी इस गुफा की रक्षा हिंसक जानवर और नाग कुल के वंशज (सांप) करते हैं, जिसके कारण वहां पहुंचना अत्यंत कठिन है।
इतिहास और शोध के बीच की कड़ी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना को लगभग 9000 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। इतने लंबे कालखंड और विदेशी आक्रमणों के कारण भारत और श्रीलंका के साझा इतिहास के कई प्रमाण नष्ट हो गए हैं। हालांकि श्रीलंका सरकार ने इस ताबूत के होने का दावा किया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक यह सिद्ध नहीं हो सका है कि यह ममी रावण की ही है।
वर्तमान में इस स्थान और ताबूत पर गहन शोध जारी है। पुरातत्वविदों का मानना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों और कार्बन डेटिंग के बाद ही किसी ठोस निर्णय पर पहुंचा जा सकता है। तब तक, यह विषय आस्था, परंपरा और शोध के संगम पर एक रहस्य बना हुआ है।
विश्वनाथ मंदिर 2.3 km, कालभैरव 4 km, संकटमोचन 1.2 km, अस्सी घाट .70 km
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