Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक काल का समय और क्या करें क्या ना करें..
– चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा और केतु के साथ युति
– 3 मार्च को सुबह 09:39 बजे से सूतक काल शुरू
– 3 मार्च को ग्रहण दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 33 मिनट तक
Chandra Grahan 2026 on Holi: पंचांग के अनुसार होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, चूंकि यह ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर पड़ रहा है, ऐसे में इसका धार्मिक महत्व भी खास माना जा रहा है।
साल का पहला चंद्र ग्रहण
पंचांग के अनुसार, 3 मार्च को ग्रहण दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। खास बात यह है कि यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे एशिया के कई देशों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जा सकेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, पूर्ण चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होती है। यह तब घटित होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिसके कारण सूर्य की किरणें सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पातीं और चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है।
इन जगहों पर दिखेगा ग्रहण
चंद्र ग्रहण पूर्वी भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में पूर्ण या अधिक स्पष्ट रूप में दिखाई देगा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के पूर्वी हिस्सों में खगोलीय घटना का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे। कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल जैसे शहरों में यह ग्रहण बेहद आकर्षक रूप में नजर आएगा। इसके साथ ही दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ और जयपुर सहित देश के कई अन्य हिस्सों में यह आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है। इस गणना के मुताबिक 3 मार्च को सुबह 09:39 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण की समाप्ति के साथ ही समाप्त माना जाएगा।
चंद्र ग्रहण और उसके सूतक काल (जो ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है) को लेकर सनातन धर्म में स्पष्ट नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं ग्रहण के दौरान क्या करें और किन कार्यों से बचें।
🚫 सूतक काल में क्या न करें? (सावधानियां)
ग्रहण के समय को नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव वाला माना जाता है, इसलिए इन कार्यों की मनाही होती है:
भोजन का सेवन: सूतक काल शुरू होने के बाद खाना पकाना और खाना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान सूक्ष्म जीवाणु तेजी से पनपते हैं।
मूर्ति स्पर्श और पूजा: ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। घर में भी देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूना मना होता है।
नुकीली वस्तुओं का प्रयोग: गर्भवती महिलाओं को विशेष सलाह दी जाती है कि वे चाकू, कैंची, सुई या किसी भी धारदार वस्तु का उपयोग न करें।
नींद और मनोरंजन: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए, बल्कि ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
✅ सूतक और ग्रहण काल में क्या करें? (उपाय)
ग्रहण के प्रभाव को कम करने और शुभ फल प्राप्ति के लिए ये कार्य करने चाहिए:
तुलसी के पत्ते का प्रयोग: सूतक शुरू होने से पहले ही दूध, दही और बचे हुए पके भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। इससे भोजन शुद्ध रहता है।
मंत्र जाप और ध्यान: ग्रहण के दौरान मानसिक रूप से अपने ईष्ट देव के मंत्रों का जाप करना (जैसे: ॐ नमः शिवाय या गायत्री मंत्र) अत्यंत लाभकारी होता है।
गंगाजल का छिड़काव: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर की सफाई करें और गंगाजल छिड़कें ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सके।
स्नान और दान: ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) के बाद स्नान करना चाहिए और अपनी क्षमता अनुसार अनाज, वस्त्र या सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए।
💡 चंद्र ग्रहण के प्रकार
चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।आंशिक चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा ही पृथ्वी की छाया में आता है, तब इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह ढकता नहीं है, बल्कि उसका एक भाग ही प्रभावित होता है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है और सूर्य की किरणें उस तक नहीं पहुंच पातीं, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है।
उपछाया चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है, तब इसे उपछाया चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इसमें चंद्रमा पर हल्का-सा प्रभाव दिखता है, जिसे सामान्य रूप से पहचानना थोड़ा कठिन होता है।
विश्वनाथ मंदिर 2.3 km, कालभैरव 4 km, संकटमोचन 1.2 km, अस्सी घाट .70 km
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