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चैत्र नवरात्रि 2026: श्रद्धा और शक्ति के महापर्व की शुरुआत, जानें शुभ मुहूर्त और क्या करें ..क्या न करें..?


​वाराणसी | समाचार डेस्क
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्म-संयम के महापर्व ‘चैत्र नवरात्रि’ का शुभारंभ हो रहा है। इस दौरान ब्रह्मांड में शक्ति का विशेष संचार होता है, जिससे साधकों को आत्मिक बल प्राप्त होता है। भक्तों के मार्गदर्शन के लिए विद्वानों ने ‘क्या करें’ और ‘क्या नहीं’ की एक स्पष्ट संहिता साझा की है, ताकि नौ दिनों की यह साधना सफल और फलदायी हो सके।

​आध्यात्मिक साधना के मुख्य स्तंभ (Dos)
​नवरात्रि का पर्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासित करने का अवसर है। विशेषज्ञों के अनुसार निम्नलिखित नियमों का पालन अनिवार्य है:

​ब्रह्म मुहूर्त का महत्व: सूर्योदय से पूर्व जागना और स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करना सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। प्रतिदिन माँ दुर्गा के नौ भिन्न स्वरूपों की विधिवत पूजा का विधान है।

​स्थापना और ज्योति: शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना (घटस्थापना) करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि आप अखंड ज्योति प्रज्वलित कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह नौ दिनों तक निरंतर जलती रहे।

​सात्विक जीवनशैली: उपवास के दौरान कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना और फलों का सेवन उत्तम है। जो लोग पूर्ण उपवास नहीं कर रहे, उन्हें भी लहसुन-प्याज रहित सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

​मंत्र और ध्यान: मानसिक शांति हेतु ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की सलाह दी गई है।

​कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी तिथि पर नौ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजन करना और उन्हें सामर्थ्य अनुसार भेंट देना इस व्रत की पूर्णता के लिए आवश्यक है।
​क्या न करें: इन बातों का रखें विशेष ध्यान (Don’ts)
​शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कुछ कार्यों की पूर्ण मनाही है ताकि आध्यात्मिक ऊर्जा खंडित न हो:

वर्जित कार्य
आहार मांस, मदिरा, तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज) और अत्यधिक नमक का सेवन न करें।
व्यवहार क्रोध, लोभ, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचें। मन में द्वेष न लाएं।
स्वच्छता पूजा स्थल पर गंदगी न होने दें। गंदे वस्त्र पहनकर साधना न करें।

जीवनशैली इन नौ दिनों में बाल काटना, नाखून काटना और चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग वर्जित माना जाता है।
यह पर्व हमें आत्म-निरीक्षण और शक्ति की उपासना के माध्यम से स्वयं को बेहतर बनाने का संदेश देता है। उचित विधि और सच्ची श्रद्धा के साथ की गई पूजा निश्चित रूप से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आती है।



विश्वनाथ मंदिर  2.0 km, कालभैरव 3 km, संकटमोचन 1.2 km, अस्सी घाट .70 km


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Author: Admin Editor MBC

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