होलाष्टक 2026: कल से थमता नजर आएगा मांगलिक कार्यों का पहिया, जानें क्या करें और क्या नहीं
धार्मिक मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है, जिसके कारण इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आने की आशंका बनी रहती है।
क्यों वर्जित हैं शुभ कार्य?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक के इन आठ दिनों में भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप द्वारा भीषण यातनाएं दी गई थीं। वहीं, एक अन्य मत के अनुसार, भगवान शिव के क्रोध से कामदेव इसी अवधि में भस्म हुए थे। ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस दौरान सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु अपनी ऊर्जा में नकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
होलाष्टक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है:
विवाह संस्कार: इस अवधि में शादी-ब्याह जैसे मांगलिक आयोजन पूरी तरह वर्जित हैं।
भवन निर्माण व गृह प्रवेश: नए घर का निर्माण शुरू करना या नए घर में प्रवेश करना अशुभ माना जाता है।
नामकरण व मुंडन: बच्चों के संस्कार जैसे मुंडन या नामकरण इस समय नहीं किए जाते।
नया व्यापार: नई दुकान खोलना या किसी बड़े व्यावसायिक समझौते पर हस्ताक्षर करने से बचना चाहिए।
वाहनों की खरीदारी: विशेष परिस्थितियों को छोड़कर नई गाड़ी या संपत्ति की खरीदारी की मनाही होती है।
क्या करें (शुभ फल के लिए)
भले ही मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और शक्ति संचय के लिए सर्वोत्तम है:
दान-पुण्य: इस समय सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अनाज और धन का दान करना अत्यंत फलदायी होता है।
मंत्र जाप: भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप मानसिक शांति प्रदान करता है।
हनुमान चालीसा का पाठ: नकारात्मकता को दूर करने के लिए हनुमान जी की पूजा विशेष फल देती है।
आगामी त्योहार की तैयारी: यह समय होलिका दहन और धुलेंडी की तैयारियों के लिए समर्पित करें।
ज्योतिषीय सलाह: यदि कोई कार्य अत्यंत अनिवार्य हो, तो विद्वान पंडितों से सलाह लेकर शांति पाठ या विशेष उपाय के बाद ही कदम उठाएं।
विश्वनाथ मंदिर 2.3 km, कालभैरव 4 km, संकटमोचन 1.2 km, अस्सी घाट .70 km
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