Tulsi Vivah 2025: आखिर कब करें तुलसी विवाह ? ये हैं शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
सनातन धर्म में कार्तिक माह को ईश्वर का महीना कहा जाता है क्योंकि इस महीने में ही भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद जागते हैं और इसी के बाद से ही वो सारे मांगलिक काम प्रारंभ हो जाते हैं, जो कि पिछले चार महीनों से बंद रहते हैं। इसलिए इस एकादशी को लोग ‘बड़ी एकादशी’ या ‘देवउठनी एकादशी’ कहते हैं, इस दिन तुलसी और शालिग्राम जी का विवाह किया जाता है।
लेकिन तुलसी विवाह के तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है। कुछ एकादशी को तो कुछ लोग कार्तिक मास की द्वादशी तिथि में तुलसी विवाह करते हैं। तो कहीं कही तुलसी विवाह उत्सव कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक मनाया जाता है। यानी कार्तिक महीने के आखिरी 5 दिन तुलसी विवाह करते हैं। आप द्वादशी तिथि को यानि आज विवाह का आयोजन कर सकते हैं।
इन कार्यों से बचें
तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पत्ते बिल्कुल नहीं तोड़ने चाहिए। भगवान को तुलसी दल का भोग लगाने के लिए एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें।
तुलसी को अशुद्ध अवस्था में नहीं छूना चाहिए। मांस-मदिरा या तामसिक चीजों का सेवन न करें। शुद्धता और सात्विकता का विशेष ख्याल रखें।
तुलसी के आस-पास गंदगी बिल्कुल न रखें। इसे माता लक्ष्मी का अपमान समझा जाता है।
तुलसी को एकादशी तिथि और रविवार के दिन जल अर्पित करना वर्जित होता हैं क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी का उपवास होता है।
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कभी धन की कमी नहीं होती है…’
मां तुलसी को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है, ये जहां रहती हैं वहां पर कभी धन की कमी नहीं होती है। तुलसी विवाह करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है तो वहीं जिनकी शादी में अड़चनें आ रही हैं, वो भी समाप्त हो जाती है।
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पूजा के लिए कौन-कौन से शुभ समय हैं?
कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि: 2 नवंबर सुबह 7:31 बजे से शुरू होकर 3 नवंबर सुबह 5:07 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 से 5:42 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:42 से 12:26 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:55 से 2:39 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:35 से 6:01 तक
सायंकाल संध्या: शाम 5:35 से 6:53 तक
अमृत काल: सुबह 9:29 से 11:00 तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से 12:31 तक (3 नवंबर की रात)
त्रिपुष्कर योग: सुबह 7:31 से शाम 5:03 तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 5:03 से अगली सुबह 6:34 तक (3 नवंबर)
घर पर कैसे करें तुलसी विवाह? आसान विधि
शाम का समय सबसे शुभ माना गया है
परिवार के सभी सदस्य शादी जैसे कपड़े पहनें
तुलसी का पौधा आंगन या पूजा घर में रखें
गन्ने से मंडप सजाएं
तुलसी को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री चढ़ाएं
गमले में भगवान शालिग्राम को रखें
दूध में भीगी हल्दी से दोनों का श्रृंगार करें
मंडप पर हल्दी लगाकर पूजा करें
मंगलाष्टक का पाठ करें
मूली, बेर, आंवला आदि पूजा में चढ़ाएं
आरती करें और प्रसाद अर्पित करें
तुलसी की 11 बार परिक्रमा करें
प्रसाद सभी मिलकर ग्रहण करें
तुलसी नामाष्टक का पाठ करें
अंत में मां तुलसी से प्रार्थना करें
विश्वनाथ मंदिर 1 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km
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