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Chandra Grahan – जानिए चंद्र ग्रहण का दुष्प्रभाव किन-किन क्षेत्रों में क्या-क्या डालेगा चंद्र ग्रहण अपना असर, क्या करें और क्या न करें के साथ-साथ देखिए अपने राशि के अनुसार से अपना भाग्य


– ज्योर्तिविद् विमल जैन, काशी

खग्रास चन्द्रग्रहण: 7 सितम्बर, रविवार
ग्रहण का स्पर्श-रात्रि 09:57 पर,
मध्य रात्रि 11:41 पर,
मोक्ष अर्द्धरात्रि के पश्चात् 01:27 पर ग्रहण का पर्वकाल-3 घंटा 30 मिनट

सम्पूर्ण भारत में खधाम चन्द्रग्रहण के रूप में विक्रम संवत् 2082 दिनांक 30 मार्च 2025 से 19 मार्च 2026 के मध्य 4 ग्रहण पड़ रहे हैं, जिसमें 2 सूर्यग्रहण तथा 2 चन्द्रग्रहण। जिनमें दोनों सूर्यग्रहण भारत में अदृश्य हैं, जबकि दोनों चन्द्रग्रहण दिखाई पड़ेंगे। पहला खग्रास चन्द्रग्रहण 7 सितम्बर 2025, रविवार को दिखाई देगा। यह ग्रहण पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र एवं कुम्भ राशि पर लगेगा। परापूर्वाभाद्रपद एवं कुम्भ राशि में जन्मे जातक को यह ग्रहण नहीं देखना चाहिए। चन्द्रग्रहण के दिन सूर्य, बुध व केतु-सिंह राशि में, चंद्रमा व राहु-कुम्भ राशि में, मंगल-कन्या राशि में, गुरु-मिथुन राशि में,शुक्र कर्क राशि में तथा शनि-मीन राशि में उपस्थित रहेंगे।

खग्रास चन्द्रग्रहण के रूप में यह चन्द्रग्रहण भारत के अतिरिक्त सम्पूर्ण एशिया, अफ्रीका, यूरोप तथा आस्ट्रेलिया, चीन, म्यामार, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इन्डोनेशिया, थाइलैंड, जर्मनी, रूस, जापान, तुर्की, इटली, फ्रांस, स्पेन, नीदरलैंड, ब्रिटेन आदि भूभागों में दृश्य होगा।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सितम्बर, शनिवार की अर्द्धरात्रि के पश्चात् 1बजकर 42 मिनट पर लग रही है, जो कि 7 सितम्बर, रविवार को रात्रि 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। इस दिन लगने वाला चन्द्रয়াগ भारतीय मानक समय के अनुसार ग्रहण का स्पर्श रात्रि 9 बजकर 57 मिनट पर, ग्रहण का मध्य रात्रि 11 बजकर 41 मिनट पर तथा ग्रहण का मोक्ष अर्द्धरात्रि के पश्चात् 01 बजकर 27 मिनट पर होगा। खग्रास चन्द्रग्रहण का पर्वकाल 3 घंटा 30 मिनट तक रहेगा। चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व यानि दिन में 12 बजकर 57 से प्रारम्भ हो जाएगा। ग्रहण के स्पर्श, मध्य एवं मोक्ष के समय स्नान करने का धार्मिक मान्यता है।

ग्रहणकाल में क्या न करें ? क्या करें ?

सूतक काल के आरम्भ होने के पूर्व मंदिरों के कपाट बन्द हो जाते हैं। सूतक काल में हास्य-विनोद, मनोरंजन, शयन, भोजन, देवी-देवता के मूर्ति या विग्रह का स्पर्श करना व्यर्थ वार्तालाप, अकारण भ्रमण, वाद-विवाद करना आदि वर्जित है। इस काल में यथा सम्भव मौन रहते हुए अपने दैनिक जरूरी कार्यों को सम्पन्न करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखना पूर्णता वर्जित है। बालक व वृद्ध एवं रोगी पथ्य एवं दवा आदि ग्रहण कर सकते हैं। सूतक काल के पूर्व भोजन, दूध व जल की शुचिता के लिए उसमें तुलसी के पते या कुश रखना चाहिए। यथासम्भव स्वच्छ एवं एकान्त स्थान पर अपने आराध्य देवी-देवता को स्मरण करके उनके मन्त्र का जप करना बाहिए। ग्रहण मोक्ष के पश्चात् स्नानोपरान्त देव-दर्शन करके यथासामध्यं दान-पुण्य करना चाहिए। दान-पुण्य की सामग्री सूतक काल के पूर्व ही व्यवस्थित करके दान करने का संकल्प लेना चाहिए। ग्रहण का मोक्ष होने पर स्नानोपरान्त उन सभी वस्तुओं का किसी ब्राहाण को दक्षिणा सहित दान कर देना चाहिए।

विश्वपटल पर चन्द्रग्रहण का प्रभाव-

चन्द्रग्रहण का प्रभाव सम्पूर्ण जगत पर प्रभाव दिखेगा। ग्रह-गोचर के फलस्वरूप विश्व के अनेक राष्ट्र प्रभावित होंगे। राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में विशेष हलचल, शेयर, वायदा व धातु बाजार में घटा-बड़ी के साथ उतार-बढ़ाव देखने को मिलेगा।

दैविक आपदाएँ, जल-थल वायु दुर्घटनाओं का प्रकोप तथा कहीं-कहीं पर आगजनी की आशंका रहेगी। कई देशों में सत्ता परिवर्तन पक्ष-विपक्ष में आरोप प्रत्यारोप बढ़ेंगे। मौसम में भी अजीवो-गरीब परिवर्तन होगा। दैविक आपदाएँ भी प्रभावी रहेंगी। जिन जातकों को शनिग्रह की अड़ाईया अथवा साढ़ेसाती हो या जन्मकुण्डली के अनुसार महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा प्रतिकूल हो तथा चन्द्रग्रह के साथ राहु या केतु हों, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही चन्द्रग्रह से सम्बन्धित मन्त्र का मानसिक जप करें तथा अपने इष्ट देवी-देवता की मानसिक आराधना करें।

चन्द्रग्रहण का द्वादश राशियों पर प्रभाव

मेष- नवसम्पर्क लाभदायक, धन आगमन का सुअवसर। शत्रु परास्त का सुअवसर। शत्रु परास्त

वृषभ – कार्यसिद्धि हेतु प्रयत्नशील। कठिनाइयों में कभी।

मिथुन-निराशा की स्थिति। क्रोध की अधिकता। आर्थिक कठिनाइयाँ प्रभावी

कर्क – व्यय की अधिकता। कायों में उदासीनता। भौतिक सुख में कभी।

सिंह- ग्रहस्थिति विपरीत। आरोग्य सुख में कमी। वाद-विवाद सम्भव।

कन्या – आरोग्य सुख की प्राप्ति। परिस्थितियों में सुधार। आकस्मिक लाभ।

तुला – सफलता में अडचने। धोखे की आशंका उन्नति का प्रयास निष्फल।

वृश्चिक- कार्य व्यवसाय में निराशा मानसिक अशान्ति। स्वास्य प्रतिकूल।

धनु – आय के नवीन साधन सुलभ प्रेम सम्बन्धों में प्रगाढ़‌ता।

मकर- समय असन्तोषजनक कार्यों के प्रति उदासीनता। योजना अधूरी।

कुम्भ – विरोधी प्रभावी ग्रहस्थिति प्रतिकूल उलझनें प्रभावी सन्तान पक्ष से चिन्ता।

मीन – प्रतिष्ठा पर आघात। क्रोष की अधिकता। दुर्घटना की सम्भावना।

राशि के अनुसार दान करना लाभकारी

मेष- लाल वस्त्र लाल चंदन गेहूं गुण तांबा मुंग मसूर घी कस्तूरी लाल फूल आदि वृषभ सफेद फूल सफेद चंदन चावल चांदी घी सफेद वस्त्र मिश्री दूध सुगंध आदि।

मिथुन – मुंग,कस्तूरी कांसा, मुंगा खांड, सरापूरकर सफेद बहन, चावल, बोली, चांदी मोती, दही, शेख, कपूर, सफेद चंदन, मिश्री आदि।

सिंह- लाल फूल लाल वस्त्र, माणिक्य, केशर तांबा घी, गेहूँ, गुड़ आदि।

कन्या – हरा फूल कस्तूरी काँसा मूंग हरा वस्त्र पन्ना घी हाथी दांत कपूर हरा फल मंगा खाड़ आदि

तुला- सुगंध सफेद चंदन सफेद फूल चावल चांदी घी सफेद वस्त्र मिश्री दूध दही

वृश्चिक – गेहूं गुड़ तांबा मूंगा लाल फूल लाल वस्त्र लाल चंदन मसूर घी कस्तूरी आदि

धनु – पीला बस चने की दाल हल्दी पीला फल पीला फूल कसा पुखराज खांड

मकर – उर्द काला तिल तेल काले वस्त्र लोहा कस्तूरी कुलथी नीलम आदि

कुंभ – काला वस्त्र काला तिल काला उड़द तिल का तेल लोहा कल छाता कस्तूरी नीलम आदि

मीन – चने का दाल पीला वस्त्र हल्दी पीला फूल पीला फल सोना खांड पुस्तक पुखराज देसी घी



विश्वनाथ मंदिर  1 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km


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Author: Admin Editor MBC

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